अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत, H-1B वीजा और भारत पर टैरिफ को लेकर ट्रंप पर बढ़ेगा दबाव
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत से H-1B वीजा, आव्रजन नीति और भारत पर लगाए गए टैरिफ के मुद्दे फिर चर्चा में हैं। नई कांग्रेस की समितियां ट्रंप प्रशासन से जवाब मांग सकती हैं, लेकिन कार्यकारी आदेशों को रद्द करना आसान नहीं होगा।
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद आव्रजन, वीजा और व्यापार से जुड़ी नीतियों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को कांग्रेस में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर भारतीय पेशेवरों, H-1B वीजा धारकों और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, कांग्रेस में बहुमत मिलने का मतलब यह नहीं है कि डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन के फैसलों को तुरंत रद्द कर सकेंगे। नई H-1B याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त और भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेशों के तहत लागू किए गए हैं। इन्हें बदलने के लिए विधायी प्रक्रिया, राष्ट्रपति की मंजूरी या राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ सकती है।
चुनावी नतीजों से कांग्रेस में बदला राजनीतिक समीकरण
3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों के बाद डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत हासिल किया। शुरुआती नतीजों में प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को कम से कम 231 सीटें और रिपब्लिकन को 141 सीटें मिली थीं। कई सीटों पर मतगणना जारी रहने के कारण आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई थी।
सीनेट में डेमोक्रेट्स ने 54 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, जबकि रिपब्लिकन के खाते में 44 सीटें आईं। इस बदलाव से डेमोक्रेट्स को आव्रजन, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसदीय समितियों के जरिए ट्रंप प्रशासन से जवाब मांगने का अधिक अवसर मिलेगा।
H-1B वीजा पर सख्ती के समर्थकों को भी झटका
चुनाव में H-1B वीजा कार्यक्रम पर सख्त रुख रखने वाले कुछ प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। ओहियो में रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड को डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन ने हरा दिया। वहीं, टेक्सास में केन पैक्सटन को डेमोक्रेट जेम्स टालारिको ने शिकस्त दी।
H-1B कार्यक्रम में बदलाव की मांग करने वाले नेताओं की हार से इस मुद्दे पर कांग्रेस में बहस का रुख बदल सकता है। हालांकि, इससे वीजा संबंधी मौजूदा नियम अपने आप समाप्त नहीं होंगे।
H-1B वीजा धारकों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, मंजूर H-1B याचिकाओं में भारत में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी करीब 69.9 प्रतिशत रही। चीन लगभग 12.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर था।
भारतीय पेशेवरों की बड़ी संख्या को देखते हुए H-1B नीति में होने वाला कोई भी बदलाव भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
डेमोक्रेटिक सांसद पहले भी इस फीस का विरोध कर चुके हैं। न्यू डेमोक्रेट कोएलिशन के सदस्यों ने जनवरी 2026 में गृह सुरक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों को 1 लाख डॉलर की नई H-1B फीस से छूट देने की मांग की थी। सांसदों का तर्क था कि इस नियम से अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों की कमी बढ़ सकती है।
भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ के खिलाफ भी उठी थी आवाज
व्यापार के मोर्चे पर भी कुछ डेमोक्रेटिक सांसद ट्रंप प्रशासन की भारत संबंधी टैरिफ नीति का विरोध कर चुके हैं। प्रतिनिधि डेबोरा रॉस, मार्क वीसी और राजा कृष्णमूर्ति ने दिसंबर 2025 में एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया था। इसका उद्देश्य भारत से आयात होने वाले सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के लिए घोषित राष्ट्रीय आपातकाल को समाप्त करना था।
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले से लागू शुल्क के अलावा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कई भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालांकि, प्रस्ताव पेश होने के बाद भी इस पर मतदान नहीं हुआ।
संसदीय समितियों के जरिए बढ़ेगी ट्रंप प्रशासन की जवाबदेही
प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स को न्यायिक समिति, गृह सुरक्षा समिति और वेज़ एंड मीन्स समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा। ये समितियां आव्रजन नीति, सीमा सुरक्षा, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS), इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) और व्यापार शुल्क जैसे विषयों की निगरानी करती हैं।
इन समितियों के पास सुनवाई आयोजित करने, दस्तावेजों के लिए समन जारी करने और प्रशासन से जवाब मांगने की शक्ति होती है। बजट और विधायी प्रस्तावों के जरिए भी वे नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन केवल समिति का नियंत्रण मिलने से राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश सीधे रद्द नहीं किए जा सकते।
भारतीय मूल के सांसदों की संख्या में भी बढ़ोतरी
नई कांग्रेस में भारतीय मूल के सांसदों की संख्या बढ़कर छह होने की संभावना है। एरिजोना के पहले कांग्रेसनल जिले में डेमोक्रेट अमीश शाह ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जे फीली पर बढ़त बनाई थी। उनके जीतने से भारतीय मूल के सांसदों की संख्या में इजाफा होगा।
इन सांसदों में प्रमिला जयपाल और रो खन्ना जैसे नेता शामिल हैं, जो आव्रजन और भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े मुद्दों पर पहले भी अपनी राय रखते रहे हैं। राजा कृष्णमूर्ति भी भारत से जुड़े व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।
जनवरी में नई कांग्रेस संभालेगी कामकाज
नई कांग्रेस जनवरी 2027 में कामकाज शुरू करेगी। इसके बाद डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच, सुनवाई और विधायी प्रस्तावों के माध्यम से दबाव बनाने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, H-1B फीस और भारत पर लगाए गए टैरिफ जैसे बड़े फैसलों में बदलाव के लिए राष्ट्रपति की भूमिका अहम बनी रहेगी। ऐसे में डेमोक्रेट्स की जीत से भारतीय पेशेवरों और भारत-अमेरिका व्यापार के मुद्दों पर बहस तेज हो सकती है, लेकिन नीतियों में तत्काल बदलाव की गारंटी नहीं है।
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