पीएम मोदी ने साझा किया महाभारत का श्लोक, सत्य और सदाचार का बताया महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महाभारत के उद्योग पर्व से जुड़ा संस्कृत श्लोक साझा किया। इस सुभाषित में सत्य से धर्म, अभ्यास से विद्या, स्वच्छता से रूप और सदाचार से परिवार की प्रतिष्ठा सुरक्षित रहने का संदेश दिया गया है।

Nov 05, 2026 - 09:47
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पीएम मोदी ने साझा किया महाभारत का श्लोक, सत्य और सदाचार का बताया महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महाभारत से जुड़ा एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने सत्य, विद्या, स्वच्छता और अच्छे आचरण के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही बताया कि धर्म की रक्षा सत्य से और परिवार की प्रतिष्ठा की रक्षा सदाचार से होती है।

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा:

“सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याभ्यासेन रक्ष्यते।

मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते॥”

इसका भावार्थ है कि सत्य से धर्म सुरक्षित रहता है, नियमित अध्ययन और अभ्यास से विद्या की रक्षा होती है, स्वच्छता से रूप निखरता है और अच्छे आचरण से परिवार की प्रतिष्ठा बनी रहती है।

महाभारत के उद्योग पर्व से लिया गया है श्लोक

यह संस्कृत सुभाषित महाभारत के उद्योग पर्व में विदुर नीति के अंतर्गत मिलता है। यह धृतराष्ट्र और महात्मा विदुर के बीच हुए संवाद का हिस्सा है। इस संवाद में विदुर ने राजा को धर्म, नीति, सदाचार और जीवन के सही मूल्यों के बारे में समझाया है।

उद्योग पर्व के इस प्रसंग में धृतराष्ट्र मनुष्य के जीवन, कर्म, भाग्य और परिस्थितियों को लेकर विदुर से मार्गदर्शन मांगते हैं। इसके जवाब में विदुर उन्हें बताते हैं कि किस तरह मोह, लोभ और अहंकार व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं। वे यह भी समझाते हैं कि ज्ञानी और नीतिवान व्यक्ति को कैसा व्यवहार करना चाहिए।

एक दिन पहले भी साझा किया था संस्कृत सुभाषित

इससे एक दिन पहले बुधवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक संस्कृत श्लोक साझा किया था। यह श्लोक आत्मज्ञान, विद्या और आंतरिक शक्ति के महत्व को बताता है।

“प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते।

आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्॥”

इसका भावार्थ है कि आत्मज्ञान के माध्यम से मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को समझता है और आंतरिक शक्ति प्राप्त करता है। विद्या व्यक्ति को उच्चतर ज्ञान और परम शांति की दिशा में आगे बढ़ाती है।

लगातार दो दिनों तक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा में बताए गए आत्मज्ञान, सत्य, विद्या और सदाचार जैसे मूल्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

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