विश्व पर्यटन दिवस 2026: पर्यटन से रोजगार, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
विश्व पर्यटन दिवस 2026 के मौके पर जानिए पर्यटन का रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर प्रभाव। सरकारी सर्वे के अनुसार 48% घरेलू overnight trips तीर्थ और धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ी रहीं।
नई दिल्ली। हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पर्यटन के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के प्रति लोगों और सरकारों को जागरूक करना है। पर्यटन के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और विरासत से परिचित होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी बढ़ते हैं।
विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत 1980 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र पर्यटन के अनुसार पर्यटन आर्थिक विकास, समावेशी विकास और सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन स्थानीय समुदायों, छोटे व्यवसायों और पारंपरिक संस्कृति के लिए भी अवसर पैदा कर सकता है।
डिजिटल तकनीक के दौर में बदल रहा पर्यटन
आज पर्यटन का क्षेत्र तेजी से डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल भुगतान, यात्रा योजना, भाषा संबंधी सुविधाएं और व्यक्तिगत यात्रा सुझावों ने पर्यटकों के अनुभव को बदल दिया है।
AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से पर्यटन स्थलों की जानकारी लोगों तक तेजी से पहुंच सकती है। वहीं, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल माध्यम छोटे कारोबारियों और स्थानीय समुदायों को नए बाजारों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
भारत में धार्मिक पर्यटन की बड़ी भूमिका
भारत में घरेलू पर्यटन में धार्मिक और तीर्थ यात्राओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी सामने आई है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के अनुसार जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान पिछले 365 दिनों में की गई घरेलू overnight trips में लगभग 48 प्रतिशत यात्राएं तीर्थ और धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ी थीं।
सर्वे के मुताबिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा यात्रा भी घरेलू पर्यटन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी यात्राओं की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में छुट्टी, मनोरंजन एवं पर्यटन यात्राओं की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत दर्ज की गई।
उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में आगे
MoSPI के सर्वेक्षण में राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों को मिलाकर उत्तर प्रदेश की कुल visitor-trips में 15.7 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई। इसके बाद तमिलनाडु 13.4 प्रतिशत और राजस्थान 8 प्रतिशत के साथ रहे।
उत्तर प्रदेश में अयोध्या, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के अलावा ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी देशभर के यात्रियों को आकर्षित करते हैं।
मेडिकल टूरिज्म पर भी बढ़ा खर्च
सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार पिछले 365 दिनों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा उद्देश्य से की गई घरेलू यात्राओं में औसत खर्च अन्य प्रमुख यात्रा उद्देश्यों की तुलना में सबसे अधिक रहा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह औसत 29,454 रुपये और शहरी परिवारों के लिए 41,649 रुपये दर्ज किया गया।
इससे पर्यटन के व्यापक स्वरूप का भी पता चलता है, जिसमें धार्मिक यात्रा के साथ स्वास्थ्य, मनोरंजन, व्यवसाय और अन्य उद्देश्यों से होने वाली यात्राएं शामिल हैं।
रोजगार और स्थानीय कारोबार के लिए अहम
पर्यटन का असर केवल होटल और ट्रैवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, रेस्तरां, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, गाइड सेवाएं और मनोरंजन से जुड़े कारोबार भी पर्यटकों की आवाजाही से प्रभावित होते हैं।
साथ ही स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कला, खान-पान और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए भी पर्यटन एक माध्यम बन सकता है। जरूरत इस बात की है कि पर्यटन का विस्तार स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ हो।
सतत और जिम्मेदार पर्यटन पर जोर
विश्व पर्यटन दिवस का महत्व केवल ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है। पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना, स्थानीय लोगों को आर्थिक अवसर देना और पर्यावरण पर दबाव कम करना भी इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।
डिजिटल तकनीक, AI और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ भारत में पर्यटन क्षेत्र के विकास के नए अवसर सामने आ रहे हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)