Yudh Abhyas 2026: औली में भारत-अमेरिका सैनिकों का सैन्य प्रशिक्षण के साथ सांस्कृतिक मेलजोल
भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण औली और राजस्थान के महाजन में चल रहा है। करीब 600-600 सैनिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ तकनीक, संयुक्त प्लानिंग और सांस्कृतिक अनुभव साझा कर रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच चल रहा संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ केवल सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन क्षमताओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के औली में आयोजित अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर भी मिल रहा है। दोनों सेनाओं के बीच यह मेलजोल आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में मदद कर रहा है।
‘युद्ध अभ्यास’ का 22वां संस्करण 15 सितंबर को औली के फॉरेन ट्रेनिंग नोड और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ शुरू हुआ। इस अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।
बद्रीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोरसों बुग्याल में ट्रेकिंग
औली में तैनात अमेरिकी सैनिकों को उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिला। बद्रीनाथ में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव के दौरान अमेरिकी जवानों ने ‘देवभूमि’ की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराओं को देखा।
इसके अलावा गोरसों बुग्याल में ट्रेकिंग के जरिए अमेरिकी सैनिकों ने हिमालय के प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी भूभाग का अनुभव किया। इस तरह सैन्य अभ्यास के दौरान प्रशिक्षण के साथ दोनों देशों के सैनिकों के बीच व्यक्तिगत और सांस्कृतिक संपर्क भी बढ़ रहा है।
संयुक्त प्लानिंग से बढ़ रही परिचालन समझ
अभ्यास में दोनों सेनाओं के स्टाफ अधिकारी संयुक्त प्लानिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। इसके तहत अधिकारी मिशन का विश्लेषण करने, उपलब्ध क्षमताओं का आकलन करने और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में संभावित चुनौतियों का मूल्यांकन करने पर काम कर रहे हैं।
दोनों पक्ष अपने अनुभव, योजना बनाने के तरीके और परिचालन प्रक्रियाओं को साझा करते हुए संयुक्त परिचालन योजना तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में जरूरत पड़ने पर दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
इंटरऑपरेबिलिटी पर खास जोर
‘युद्ध अभ्यास 2026’ का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। अभ्यास के दौरान दोनों सेनाएं रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा कर रही हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अभ्यास से दोनों सेनाओं को अलग-अलग भूभाग और परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को बेहतर करने का अवसर मिल रहा है। खास तौर पर पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के संचालन पर जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम भी प्रशिक्षण का हिस्सा
इस संस्करण में आधुनिक तकनीक को भी प्रमुखता दी गई है। औली में निगरानी और टोही के लिए ड्रोन तथा ऑटोनॉमस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही काउंटर-यूएएस प्रशिक्षण भी अभ्यास का हिस्सा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, प्रशिक्षण में पर्वतीय युद्ध, ठंडे मौसम में संचालन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं पर भी काम किया जा रहा है।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन और लाइव-फायर गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार यहां HIMARS, Stinger और M-LIDS जैसी प्रणालियों से जुड़ा प्रशिक्षण भी शामिल है।
सैनिकों के बीच बढ़ रहा आपसी विश्वास
‘युद्ध अभ्यास 2026’ में सैन्य प्रशिक्षण के साथ सैनिकों के बीच आपसी संवाद और अनुभव साझा करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिकी और भारतीय जवान एक-दूसरे के हथियारों, उपकरणों और अनमैन्ड सिस्टम को समझ रहे हैं।
ऐसे प्रशिक्षण से दोनों सेनाओं को अपनी-अपनी कार्यप्रणाली और तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता है। इससे संयुक्त मिशन के दौरान समन्वय और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
दो स्थानों पर एक साथ चल रहा अभ्यास
22वें ‘युद्ध अभ्यास’ का आयोजन इस बार औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में समानांतर रूप से किया जा रहा है। औली में पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय परिस्थितियों में प्रशिक्षण पर जोर है, जबकि महाजन में हथियार प्रणालियों और लाइव-फायर गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारत-अमेरिका का यह वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक, परिचालन अनुभव और प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करता है। इस बार सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक मेलजोल भी अभ्यास का अहम हिस्सा बनकर सामने आया है।
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