राष्ट्रपति मुर्मु का बयान, नक्सलवाद के बाद विकास की राह पर छत्तीसगढ़
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर के लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा महोत्सव-2026 के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विकास, नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव और आदिवासी उद्यमियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने पर बात की। उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में आदिवासी युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा महोत्सव-2026 के कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खतरा कम हुआ है और राज्य अब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आदिवासी युवा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है। उनके मुताबिक, इस चुनौती से निपटने के लिए किए गए प्रयासों के बाद राज्य में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
रामायण का उल्लेख कर आदिवासी समुदायों की भूमिका पर कही बात
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि रावण पर विजय हासिल करने में वानर सेना और ऋषि-मुनियों के साथ जंगलों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की भूमिका को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझना जरूरी है। राष्ट्रपति ने बस्तर के लोगों की परंपराओं और योगदान को सम्मान देने पर भी जोर दिया।
आदिवासी उद्यमियों को बाजार से जोड़ने पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास के नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि आदिवासी उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयासों से आदिवासी समुदायों की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और विकास का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका अहम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी युवाओं से देश की विकास यात्रा में सक्रिय योगदान देने की अपेक्षा जताई।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक अवसरों तक पहुंच बढ़ने से युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति का संबोधन बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, आदिवासी समाज की भूमिका और क्षेत्र में विकास के अवसरों पर केंद्रित रहा।
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