Dussehra 2026: भारत के अलावा इन देशों में भी मनाया जाता है दशहरा
दशहरा यानी विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और अमेरिका में रहने वाले हिंदू तथा भारतीय समुदाय भी इसे अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाते हैं। कहीं दशईं के रूप में टीका और जमरा देने की परंपरा है, तो कहीं दुर्गा पूजा, रामलीला और रावण दहन के जरिए त्योहार मनाया जाता है।
भारत के त्योहार अब देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित टाइम्स स्क्वायर पर लोगों के गरबा करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। भारतीय संगीत की धुनों पर लोगों के नृत्य ने एक बार फिर दुनिया में भारतीय संस्कृति की लोकप्रियता को उजागर किया।
नवरात्रि के बाद मनाया जाने वाला दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों में भी अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। खासकर नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीय तथा हिंदू समुदाय इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
दशहरे का प्रमुख संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है। भारत में यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और कई धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ा हुआ है।
नेपाल में दशईं के रूप में मनाया जाता है त्योहार
नेपाल में दशहरे को ‘दशईं’ कहा जाता है और यह वहां के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दौरान लोग देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और परिवार के साथ उत्सव मनाते हैं। बड़े-बुजुर्ग अपने से छोटों के माथे पर टीका लगाकर और जमरा देकर आशीर्वाद देते हैं।
नेपाल में दशईं का उत्सव कई दिनों तक चलता है। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, पारिवारिक मिलन और पारंपरिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। त्योहार के प्रमुख दिनों में बाजारों और घरों में विशेष रौनक देखने को मिलती है।
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा और विजयादशमी की धूम
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए दुर्गा पूजा और विजयादशमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर पूजा पंडाल सजाए जाते हैं, मां दुर्गा की आराधना होती है और विजयादशमी पर परंपरा के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
ढाका सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों और पूजा मंडपों में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रमना काली मंदिर, सिद्धेश्वरी काली मंदिर और ढाका विश्वविद्यालय के जगन्नाथ हॉल जैसे स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
पूजा मंडपों की संख्या और आयोजनों से जुड़े आंकड़े हर साल बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष वर्ष में बनाए गए मंडपों की संख्या के लिए संबंधित पूजा आयोजन परिषद या आधिकारिक स्रोत के आंकड़ों को देखना जरूरी है।
श्रीलंका में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाती है विजयादशमी
श्रीलंका में तमिल हिंदू समुदाय सहित कई हिंदू परिवार नवरात्रि और विजयादशमी को धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाते हैं। इस अवसर पर मंदिरों में पूजा-पाठ और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
हालांकि, श्रीलंका में भारत के कुछ हिस्सों की तरह बड़े स्तर पर रावण दहन की परंपरा हर जगह प्रचलित नहीं है। रामायण से जुड़े कार्यक्रम और अन्य धार्मिक आयोजन समुदाय तथा स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। दशहरे के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश की स्थिति भी देश की आधिकारिक छुट्टियों की सूची पर निर्भर करती है।
अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच दशहरे का उत्सव
अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी दशहरा और विजयादशमी को उत्साह के साथ मनाते हैं। कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी, टेक्सास, इलिनोइस, जॉर्जिया, मिशिगन, फ्लोरिडा और वाशिंगटन जैसे राज्यों में भारतीय समुदायों के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।
इन कार्यक्रमों में पूजा-पाठ, संगीत, नृत्य, रामलीला, सामुदायिक मिलन और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हो सकती हैं। कुछ स्थानों पर रावण दहन भी आयोजित किया जाता है। आयोजन की तारीख और स्वरूप स्थानीय मंदिरों, सामुदायिक संगठनों तथा आयोजकों के कार्यक्रम पर निर्भर करता है।
ऐसे उत्सव विदेशों में पली-बढ़ी नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और त्योहारों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विदेशों में कैसे मनाया जाता है दशहरा?
दशहरा मनाने का तरीका हर देश और समुदाय में एक जैसा नहीं है। कुछ जगहों पर भगवान श्रीराम की विजय की याद में रामलीला और रावण दहन किया जाता है। वहीं, दुर्गा पूजा की परंपरा वाले समुदायों में मां दुर्गा की आराधना के बाद विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन होता है।
कई देशों में मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाती हैं। इन आयोजनों के जरिए लोग अपनी परंपराओं को जीवित रखते हैं और स्थानीय समुदायों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाते हैं।
दशहरे का संदेश क्या है?
दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। अलग-अलग देशों में इसे मनाने के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन इसके मूल संदेश में समानता है—बुराई पर अच्छाई की जीत और सकारात्मक मूल्यों की महत्ता।
विदेशों में दशहरे और विजयादशमी के आयोजन यह भी दिखाते हैं कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे समुदायों के जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई हैं।
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