भारत-गुयाना समझौते: 500 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा, UPI जैसी भुगतान प्रणाली पर सहयोग

भारत और गुयाना ने व्यापार, निवेश, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। CHOGM 2026 के दौरान हुई बैठक में तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और गुयाना के लिए 500 मिलियन डॉलर की नई ऋण सुविधा की घोषणा हुई।

Nov 05, 2026 - 14:16
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भारत-गुयाना समझौते: 500 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा, UPI जैसी भुगतान प्रणाली पर सहयोग

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) के दौरान गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई। साथ ही, साझा हितों से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढांचे, डिजिटल तकनीक और क्षमता निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के उपायों पर विचार किया गया।

तीन अहम समझौतों पर बनी सहमति

जयशंकर और राष्ट्रपति इरफान अली की मौजूदगी में भारत और गुयाना के बीच तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को विस्तार देना है।

समझौतों में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) की विनिर्माण परियोजनाओं की आपूर्ति और स्थापना, त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं (QIPs) के लिए अनुदान सहायता तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़े समझौते के तहत गुयाना में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने और उसके संचालन में सहयोग का प्रावधान है।

गुयाना को 500 मिलियन डॉलर की नई ऋण सुविधा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुयाना की विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सहायता देने के लिए भारत की ओर से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की नई ऋण सुविधा (Line of Credit) देने की घोषणा भी की।

इस वित्तीय सहायता से गुयाना की प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारत पहले भी गुयाना में विभिन्न विकास परियोजनाओं में सहयोग कर चुका है। नई ऋण सुविधा से दोनों देशों की विकास साझेदारी को और विस्तार मिल सकता है।

ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित है भारत-गुयाना की साझेदारी

भारत और गुयाना के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच मजबूत संपर्क पर आधारित हैं। दोनों देश वैश्विक दक्षिण के साझेदार होने के साथ-साथ राष्ट्रमंडल के सदस्य भी हैं।

विकास, आर्थिक प्रगति और समृद्धि से जुड़ी साझा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत और गुयाना व्यापार, तकनीक, बुनियादी ढांचे तथा क्षमता निर्माण सहित कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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