भारत बढ़ाएगा ऑयल रिफाइनिंग क्षमता, 272 से 300 MMT प्रति वर्ष का लक्ष्य
वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच भारत अपनी ऑयल रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा साझेदारी मजबूत होगी।
भारत 300 एमएमटीपीए रिफाइनिंग क्षमता की ओर बढ़ रहा, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
वैश्विक स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत अपनी तेल रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, देश की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता करीब 272 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने की तैयारी है।
दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग हब में भारत
भारत वर्तमान में दुनिया के बड़े तेल रिफाइनिंग देशों में शामिल है। देश में करीब 23 रिफाइनरियां संचालित हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 270 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है। क्षमता विस्तार के बाद भारत की वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है।
भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनना लक्ष्य
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता को सिर्फ घरेलू संपत्ति के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे मित्र देशों को स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध कराने के माध्यम के तौर पर भी देखता है। खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एक विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार की भूमिका को मजबूत करना चाहता है।
भारत-मॉरिशस ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा
भारत और मॉरिशस के बीच हाल में हुए ऊर्जा क्षेत्र के समझौतों को दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार से सरकार और कारोबार से कारोबार के स्तर पर हुए समझौतों से मॉरिशस को पेट्रोलियम उत्पादों की नियमित एवं भरोसेमंद आपूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।
इंडियन ऑयल बनेगा प्रमुख आपूर्तिकर्ता
समझौते के तहत इंडियन ऑयल अगले तीन वर्षों तक मॉरिशस के लिए प्रमुख पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता के रूप में काम करेगा। इसके अलावा इंडियन ऑयल और मॉरिशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच पांच साल की सुनिश्चित आपूर्ति व्यवस्था भी की गई है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ेगी भारत की भूमिका
रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के साथ मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते भारत की वैश्विक ऊर्जा भूमिका को मजबूत कर सकते हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता भारत को घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर साझेदार देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सक्षम बनाएगी।
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