भारत का बड़ा अंतरिक्ष लक्ष्य, 2030 तक हर साल 50 लॉन्च की तैयारी
भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमता और पहुंच को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। आईएन-स्पेस के चेयरमैन पवन के गोयनका के अनुसार, भारत ने 2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण करने का लक्ष्य रखा है। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी, इसरो की तकनीकी विशेषज्ञता और तेजी से विकसित हो रहे स्पेस स्टार्टअप्स इस अभियान के प्रमुख आधार हैं। सरकार का जोर रॉकेट और उपग्रह निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरिक्ष आधारित सेवाओं को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर है। माना जा रहा है कि इस विस्तार से भारत की स्पेस इकोनॉमी, रोजगार और तकनीकी क्षेत्र को भी नई गति मिल सकती है।
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी शुरू कर दी है। आईएन-स्पेस के चेयरमैन पवन के गोयनका के मुताबिक, देश ने वर्ष 2030 तक हर साल करीब 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में इसरो की तकनीकी क्षमता और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी अहम भूमिका निभाएगी।
गोयनका के अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का महत्वपूर्ण फैसला लिया था। इसका उद्देश्य एक ओर इसरो को नई और उन्नत तकनीकों पर अधिक ध्यान देने का अवसर देना था, वहीं दूसरी ओर निजी उद्योगों को अंतरिक्ष कारोबार में बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने का रास्ता उपलब्ध कराना था।
तेजी से बढ़ा निजी स्पेस सेक्टर
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। गोयनका ने बताया कि जहां पहले ऐसे स्टार्टअप्स की संख्या काफी कम थी, वहीं अब यह आंकड़ा 400 से अधिक हो गया है। निजी कंपनियां रॉकेट और सैटेलाइट के विकास के साथ-साथ पृथ्वी अवलोकन और अन्य अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में भी काम कर रही हैं।
भारत की एक निजी कंपनी कक्षा में रॉकेट भेजने में सफलता हासिल कर चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि देश का निजी अंतरिक्ष उद्योग अब शुरुआती प्रयोगों से आगे बढ़कर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अपनी क्षमता विकसित कर रहा है।
बड़े पैमाने पर उत्पादन पर जोर
गोयनका का कहना है कि अब भारत के सामने अगली बड़ी चुनौती अंतरिक्ष क्षेत्र को बड़े पैमाने पर विकसित करने की है। इसके लिए रॉकेट और उपग्रहों का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लॉन्च क्षमता और नई अंतरिक्ष तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 9 अरब डॉलर की बताई जा रही है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह कई गुना बढ़ सकती है। इसी के साथ निजी निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
इसरो और निजी कंपनियों की अलग-अलग भूमिका
भविष्य की रणनीति में इसरो का मुख्य जोर नई तकनीकों और जटिल मिशनों को विकसित करने पर रहेगा, जबकि निजी कंपनियां इन तकनीकों को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल और दिगांतारा जैसी भारतीय कंपनियां लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रही हैं।
गोयनका के मुताबिक भारत के लिए लक्ष्य सिर्फ अंतरिक्ष में मिशन भेजना नहीं है, बल्कि देश में निर्माण क्षमता विकसित करके दुनिया के लिए अंतरिक्ष सेवाएं उपलब्ध कराना भी है। इससे अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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