PM Modi Subhashitam: पीएम मोदी ने साझा किया महाभारत का श्लोक, समृद्धि को लेकर दिया संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाभारत के शान्तिपर्व का संस्कृत श्लोक ‘सुभाषितम’ के रूप में साझा किया। श्लोक में दृढ़ निश्चय, कर्मठता, वीरता, धैर्य और विद्वता को समृद्धि से जोड़ा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘सुभाषितम’ साझा किया। इस बार उन्होंने महाभारत के शान्तिपर्व से लिया गया एक संस्कृत श्लोक पोस्ट किया। श्लोक के जरिए कर्मठता, वीरता, धैर्य, अनुशासन और ज्ञान जैसे गुणों के महत्व को रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि दृढ़ निश्चयी, पराक्रमी, धैर्यवान और विद्वान व्यक्ति के साथ समृद्धि उसी तरह बनी रहती है, जैसे सूर्य के साथ उसकी किरणें रहती हैं।
महाभारत के शान्तिपर्व का श्लोक साझा किया
पीएम मोदी ने जो श्लोक साझा किया, वह इस प्रकार है—
“अद्वैधमनसं युक्तं शूरं धीरं विपश्चितम्।
न श्रीः सन्त्यजते नित्यमादित्यमिव रश्मयः॥”
इसका भावार्थ है कि जिस व्यक्ति का मन दुविधा से मुक्त हो, जो कर्मठ और अनुशासित हो, वीरता एवं धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करे और ज्ञान से संपन्न हो, उसके जीवन में समृद्धि बनी रहती है। इसकी तुलना सूर्य और उसकी किरणों से की गई है, जो एक-दूसरे से अलग नहीं होते।
श्लोक में बताए गए गुणों का अर्थ
श्लोक में अलग-अलग शब्दों के माध्यम से व्यक्ति के कई महत्वपूर्ण गुणों का उल्लेख किया गया है। ‘अद्वैधमनसं’ ऐसे मन की ओर संकेत करता है जो दुविधा से मुक्त और दृढ़ निश्चयी हो।
‘युक्तं’ का अर्थ संयमित, अनुशासित और अपने कार्य के प्रति समर्पित व्यक्ति से जुड़ा है। वहीं ‘शूरं’ वीरता और पराक्रम का प्रतीक है। ‘धीरं’ ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जो कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखता है।
‘विपश्चितम्’ का संबंध विद्वता, बुद्धिमत्ता और ज्ञान से है। इस तरह पूरा श्लोक व्यक्ति के भीतर दृढ़ता, कर्मठता, साहस, धैर्य और ज्ञान के महत्व को सामने रखता है।
समृद्धि को सूर्य की किरणों से जोड़ा
श्लोक के अगले हिस्से में ‘श्री’ को समृद्धि के अर्थ में इस्तेमाल किया गया है। संदेश यह है कि जिन लोगों में बताए गए गुण मौजूद होते हैं, उनके साथ समृद्धि लगातार बनी रहती है।
इसके लिए श्लोक में सूर्य और उसकी किरणों का उदाहरण दिया गया है। जिस तरह सूर्य की किरणें उससे अलग नहीं होतीं, उसी तरह कर्मठ, साहसी, धैर्यवान और विद्वान व्यक्ति के जीवन से समृद्धि के जुड़े रहने की बात कही गई है।
11 सितंबर को भी साझा किया था सुभाषितम
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 11 सितंबर को भी ‘सुभाषितम’ साझा कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने महाभारत से संबंधित एक संस्कृत श्लोक पोस्ट किया था, जिसमें जनप्रतिनिधियों के कर्तव्यों और समाज में न्याय, समरसता तथा लोककल्याण को बढ़ावा देने की बात कही गई थी।
10 जून को भी पोस्ट किया था संस्कृत श्लोक
इससे पहले 10 जून को पीएम मोदी ने एक अन्य संस्कृत श्लोक साझा किया था। इसमें जनसेवा, सुशासन, विनम्रता, संयम और जनकल्याण को नेतृत्व के महत्वपूर्ण गुणों के रूप में बताया गया था।
इस तरह प्रधानमंत्री की ओर से समय-समय पर साझा किए जाने वाले ‘सुभाषितम’ में संस्कृत साहित्य और महाभारत के श्लोकों के माध्यम से कर्तव्य, नेतृत्व, सेवा, ज्ञान और जीवन मूल्यों से जुड़े संदेश सामने रखे जा रहे हैं।
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