UN के अंतरराष्ट्रीय न्याय तंत्र के समर्थन में भारत, युद्ध अपराधों में जवाबदेही पर जोर
भारत ने रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों के लिए स्थापित IRMCT का समर्थन किया। मनीष तिवारी ने पीड़ितों की सुरक्षा, न्यायिक निष्पक्षता और अभिलेखों के संरक्षण पर जोर दिया।
भारत ने रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया में हुए युद्ध अपराधों तथा नरसंहार से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय तंत्र का समर्थन किया है। भारत ने कहा कि इस व्यवस्था के शेष कार्यों को पूरा करना जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा पर भारत का जोर
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में इंटरनेशनल रेसिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स (IRMCT) पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस तंत्र को पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं को सहयोग तथा न्यायाधिकरणों के रिकॉर्ड के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य जारी रखने चाहिए।
तिवारी ने इन जिम्मेदारियों को अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की विरासत सुरक्षित रखने और दोषियों को जवाबदेह बनाने के लिए अहम बताया।
रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के मामलों से जुड़ा है तंत्र
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2010 में IRMCT की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के अधूरे कार्यों को पूरा करना था।
रवांडा में 1994 के नरसंहार के दौरान बड़ी संख्या में तुत्सी समुदाय के लोगों और उदारवादी हुतुओं की हत्या हुई थी। इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाने में रवांडा न्यायाधिकरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं, पूर्व यूगोस्लाविया के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने युद्ध अपराधों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। इन न्यायिक प्रक्रियाओं ने गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जिम्मेदारी तय करने की दिशा में योगदान दिया।
न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता बनाए रखने की अपील
मनीष तिवारी ने कहा कि IRMCT को अपना काम न्याय, निष्पक्षता, समानता और उचित कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय सुनिश्चित करने के साथ पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा भी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।
भारत के अनुसार, इस तंत्र की भूमिका केवल दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय न्यायिक प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने और महत्वपूर्ण कानूनी अभिलेखों को सुरक्षित रखने में भी इसका योगदान है।
जनादेश पूरा होने पर व्यवस्थित बदलाव की जरूरत
भारत ने कहा कि IRMCT अपने निर्धारित कार्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भविष्य के लिए बदलाव की प्रक्रिया व्यवस्थित, कुशल और समयबद्ध होनी चाहिए।
मनीष तिवारी ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में न्यायिक स्वतंत्रता और शेष जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन से समझौता नहीं होना चाहिए।
भारत का समर्थन अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में जवाबदेही, पीड़ितों के अधिकारों और गंभीर अपराधों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया को जारी रखने के महत्व को रेखांकित करता है।
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