UN के बकाये पर भारत की अपील, सभी देशों से समय पर योगदान जमा करने को कहा
संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति में भारत ने सभी सदस्य देशों से अपना निर्धारित योगदान समय पर और बिना शर्त जमा करने की अपील की। भारत ने UN के विकास एजेंडे और शांति अभियानों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में अपना निर्धारित योगदान समय पर जमा करने वाले देशों की सूची में भारत लगातार शामिल रहा है। अब भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से अपील की है कि वे संगठन को अपना निर्धारित वित्तीय योगदान समय पर और बिना किसी शर्त के उपलब्ध कराएं।
यह मुद्दा सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति की बैठक में भारत की ओर से भाजपा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने उठाया। पांचवीं समिति संयुक्त राष्ट्र के प्रशासनिक और बजटीय मामलों पर विचार करती है।
गुर्जर ने कहा कि भारत ने सामान्य बजट में अपने हिस्से का निर्धारित योगदान समय पर जमा किया है। उन्होंने सभी सदस्य देशों से भी इसी तरह अपने वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करने का आग्रह किया।
UN के विकास एजेंडे के लिए पर्याप्त फंडिंग पर जोर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास संबंधी कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई। भारत की ओर से कहा गया कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए UN के विकास एजेंडे के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
समिति की बैठक में आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सांसद गुम्मा थानुजा रानी ने भी विकास एजेंडे से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने महासभा के मौजूदा सत्र में सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और विकास संबंधी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
UN की वित्तीय स्थिति पर चिंता
बैठक में संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति का मुद्दा भी चर्चा में रहा। संगठन के प्रमुख योगदानकर्ताओं की ओर से निर्धारित राशि के भुगतान में देरी के चलते UN के बजट पर वित्तीय दबाव बढ़ने की चिंता सामने आती रही है।
भारत ने इस संदर्भ में सदस्य देशों से अपने वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करने की अपील की। नई दिल्ली का जोर इस बात पर रहा कि संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए स्थिर और पर्याप्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं।
शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों का मुद्दा
बंशीलाल गुर्जर ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिक और पुलिसकर्मी भेजने वाले देशों को भुगतान में होने वाली देरी पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि शांति अभियानों में बड़ी संख्या में योगदान देने वाले देश विकासशील हैं। यदि उन्हें UN की ओर से भुगतान समय पर नहीं मिलता है, तो उन देशों पर अप्रत्यक्ष वित्तीय दबाव पड़ता है।
भारत ने सदस्य देशों के योगदान में देरी और शांति अभियानों के लिए आवश्यक भुगतान के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
‘भुगतान करने की क्षमता’ के सिद्धांत का समर्थन
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में सदस्य देशों के हिस्से का निर्धारण करते समय ‘भुगतान करने की क्षमता’ यानी capacity to pay के सिद्धांत के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
गुर्जर ने कहा कि इस सिद्धांत से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि विकासशील देशों पर असमान रूप से ज्यादा वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
हिंदी में दिया संबोधन
संयुक्त राष्ट्र की पांचवीं समिति में बंशीलाल गुर्जर ने हिंदी में अपना संबोधन दिया। उनके भाषण का संयुक्त राष्ट्र की पांच आधिकारिक भाषाओं में एक साथ अनुवाद किया गया।
भारत की ओर से दिए गए वक्तव्यों में समय पर वित्तीय योगदान, विकास एजेंडे के लिए संसाधन और UN शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों को समय पर भुगतान जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
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