ईरान ने बदली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, संभावित खतरे से पहले कार्रवाई की बात

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने संभावित खतरों के खिलाफ पहले कार्रवाई करने की रणनीति के संकेत दिए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने नई बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासेम बसीर’ की क्षमताओं को रक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताया है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ा है।

Sep 08, 2026 - 10:55
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ईरान ने बदली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, संभावित खतरे से पहले कार्रवाई की बात

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच तेहरान ने अपनी रक्षा नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया में कहा गया है कि देश भविष्य में किसी खतरे के पूरी तरह सामने आने का इंतजार करने के बजाय संभावित हमले या खतरे को पहले ही रोकने के लिए कार्रवाई कर सकता है।

ईरानी सरकारी मीडिया ने बेहतर क्षमता वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का उल्लेख करते हुए इसे देश की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताया है। रिपोर्ट में ‘कासेम बसीर’ नाम की मिसाइल की क्षमताओं का जिक्र किया गया है।

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े मोहसिन रेजाई ने इससे पहले सरकारी टेलीविजन पर दावा किया था कि ईरान की नई मिसाइल क्षमता का परीक्षण अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि जिस मिसाइल के परीक्षण का उन्होंने उल्लेख किया, वह वही ठोस ईंधन वाली ‘कासेम बसीर’ मिसाइल थी या कोई दूसरी मिसाइल।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कासेम बसीर’ में पहले की तुलना में बेहतर मारक क्षमता और सटीकता होने का दावा किया गया है। इसमें करीब आधा टन वजन का वारहेड होने की बात कही गई है। इस मिसाइल को पिछले वर्ष सार्वजनिक किया गया था और उस समय इसकी घोषित रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर बताई गई थी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। अमेरिकी पक्ष ने शनिवार को दावा किया था कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके बाद अमेरिका की ओर से तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई।

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजराइल पहले भी चिंता जताते रहे हैं। इसी मुद्दे को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया था।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी टकराव

ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर कथित ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’ बनाने की घोषणा ने भी तनाव बढ़ा दिया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे जहाजों की निगरानी या उन्हें रोकना होगा, जिन पर तेहरान को संदेह हो कि वे जलडमरूमध्य के रास्ते आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

अमेरिकी व्हाइट हाउस ने ईरान की इस घोषणा को स्वीकार नहीं किया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात जारी है और वहां संचालन पर उसका नियंत्रण बना हुआ है।

अमेरिका की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिकी नौसेना ने जलडमरूमध्य को बारूदी सुरंगों से मुक्त कर दिया है और गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।

इस बीच ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है। सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति मार्गों को लेकर बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।

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