Jaishankar-Guterres Meeting: वैश्विक संघर्षों और Global South पर हुई अहम चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात कर दुनिया में जारी संघर्षों और Global South पर उनके प्रभाव को कम करने पर चर्चा की।

Sep 30, 2026 - 09:24
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Jaishankar-Guterres Meeting: वैश्विक संघर्षों और Global South पर हुई अहम चर्चा

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और उनके व्यापक प्रभावों को कम करने के उपायों पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि बातचीत का मुख्य फोकस मौजूदा संघर्षों को कम करने और खास तौर पर ग्लोबल साउथ पर पड़ रहे उनके प्रभाव को घटाने की जरूरत पर रहा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मौजूदा दौर में यूक्रेन, मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों के संघर्षों का मानवीय और आर्थिक असर वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है।

Global South की चुनौतियों पर भारत का जोर

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यक्रमों में ग्लोबल साउथ की भूमिका और उसकी चुनौतियों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को उन वैश्विक फैसलों में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए, जिनका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।

भारत ने संघर्षों के अलावा सप्लाई चेन, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, विकास वित्त और बहुपक्षीय संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही है।

अमेरिका की रणनीतिक स्वायत्तता पर जयशंकर की टिप्पणी

गुटेरेस के साथ बैठक से पहले न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अब एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन, यूरोप और एशिया के अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को संभाल रहा है।

जयशंकर ने इसे भारत की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक स्वायत्तता की नीति से जोड़ते हुए कहा कि भारत भी अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए रखता आया है।

'Chewing Gum' वाले उदाहरण पर मजाक

कार्यक्रम में अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल ने अलग-अलग देशों के साथ एक साथ संबंध संभालने के लिए अमेरिकी कहावत ‘च्यूइंग गम चबाना और चलना’ का उदाहरण दिया।

जयशंकर ने इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए मजाक में कहा कि उन्हें लगता है कि वाशिंगटन में उस ‘गम’ की काफी बड़ी सप्लाई है। उनका संदर्भ अमेरिका द्वारा अलग-अलग और कभी-कभी परस्पर विरोधी हितों वाले देशों के साथ एक साथ संबंध संभालने से था।

बदलते वैश्विक समीकरणों पर भारत का नजरिया

जयशंकर ने कहा कि पहले भारत जैसे देशों से अपने रणनीतिक विकल्प सीमित रखने और किसी एक प्रमुख शक्ति के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने की अपेक्षा की जाती थी। उनके मुताबिक, अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कई देश एक साथ अलग-अलग साझेदारियों को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने इस बदलाव को बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की दिशा में हो रहे परिवर्तन से जोड़ा। जयशंकर के अनुसार, देश अब अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों के साथ समानांतर संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं।

संघर्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास

गुटेरेस के साथ जयशंकर की बैठक ऐसे समय हुई है जब संयुक्त राष्ट्र कई क्षेत्रों में जारी संघर्षों, मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी हाल में वैश्विक स्तर पर बढ़ती विभाजनकारी प्रवृत्तियों और युद्धों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।

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