नेपाल में बाढ़ के बाद गहरा मानसिक संकट, डर और सदमे से जूझ रहे हजारों लोग

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद लोगों के सामने मानसिक स्वास्थ्य का बड़ा संकट उभर रहा है। बच्चों में डरावने सपने और वयस्कों में बेचैनी व तनाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने प्रभावित जिलों में मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं की तैनाती बढ़ाई है। फोन हेल्पलाइन के जरिए भी प्रभावित लोगों को मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

Sep 01, 2026 - 14:20
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नेपाल में बाढ़ के बाद गहरा मानसिक संकट, डर और सदमे से जूझ रहे हजारों लोग
नेपाल में बाढ़ के बाद गहरा मानसिक संकट, डर और सदमे से जूझ रहे हजारों लोग
नेपाल में बाढ़ के बाद गहरा मानसिक संकट, डर और सदमे से जूझ रहे हजारों लोग
नेपाल में बाढ़ के बाद गहरा मानसिक संकट, डर और सदमे से जूझ रहे हजारों लोग

नेपाल में भयंकर बाढ़ का पानी कई इलाकों से उतर चुका है, लेकिन आपदा का असर लोगों की मानसिक स्थिति पर अब भी बना हुआ है। राहत शिविरों में रह रहे कुछ बच्चे रात में डरकर उठ रहे हैं, जबकि कई वयस्कों में लगातार चिंता, घबराहट और डर जैसी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। दूसरी ओर, लापता परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों पर मानसिक दबाव और बढ़ गया है।

हालिया बाढ़ को नेपाल में पिछले कई वर्षों की गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में गिना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने के बाद प्रभावित परिवारों को अपने घर, संपत्ति और सामान्य जीवन से भी हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा का मानसिक प्रभाव आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकता है।

प्रभावित इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य टीमों की तैनाती

स्थिति को देखते हुए नेपाल सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं। इनमें मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक और मनोसामाजिक परामर्शदाता शामिल हैं। बागमती प्रांत में भी प्रशिक्षित काउंसलरों को जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता के लिए तैयार रखा गया है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित लोगों को शुरुआती मनोवैज्ञानिक सहायता देना, उनकी जरूरतों का आकलन करना और उन्हें जरूरी सेवाओं से जोड़ना है।

बच्चों में दिखाई दे रहा बाढ़ का डर

नुवाकोट में राहत केंद्रों के आसपास काम कर रहे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कई लोग अभी भी आपदा के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं। कुछ बच्चे रात में डरकर जाग जाते हैं और उन्हें दोबारा बाढ़ आने के सपने परेशान कर रहे हैं।

वयस्कों में भी लगातार बेचैनी, डर और अचानक होने वाली आवाजों या गतिविधियों से जरूरत से ज्यादा घबरा जाने जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रतिक्रियाएं गंभीर आपदा के बाद शुरुआती मानसिक तनाव का हिस्सा हो सकती हैं।

अभी काउंसलिंग से ज्यादा राहत और सुरक्षा पर जोर

मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि मौजूदा समय में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान, चिकित्सा सुविधा, भोजन और अपने लापता परिजनों की जानकारी दिलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए विस्तृत काउंसलिंग की तुलना में फिलहाल मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब आपात स्थिति पूरी तरह समाप्त होगी, तब बाढ़ के कारण पैदा हुए मानसिक तनाव और आघात की वास्तविक तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।

फोन पर भी मिल रही मनोसामाजिक मदद

नेपाल में प्रभावित लोगों के लिए टेलीफोन के जरिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सामान्य स्वास्थ्य सहायता वाली हेल्पलाइन के कर्मचारियों को बुनियादी मनोसामाजिक मदद के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा विशेष मानसिक स्वास्थ्य सेवा के जरिए लोगों को परामर्शदाताओं से जोड़ा जा रहा है।

बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध है।

परिवारों को फिर से जोड़ना बड़ी चुनौती

राहत कार्यों के बीच मानसिक स्वास्थ्य टीमों का एक महत्वपूर्ण काम बाढ़ के दौरान बिछड़े परिवारों को दोबारा मिलाने में मदद करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों ने केवल अपने घर और सामान ही नहीं खोए हैं, बल्कि कई परिवारों ने अपने सामाजिक परिवेश और रोजमर्रा की जिंदगी का आधार भी खो दिया है।

ऐसे में प्रभावित लोगों को लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक सहायता की जरूरत पड़ सकती है। सरकार और सहयोगी संस्थाएं राहत एवं पुनर्वास के साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भी आगे बढ़ाने पर काम कर रही हैं।

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