निर्मला सीतारमण ने गिनाईं भारत की आर्थिक ताकतें, AI-डेटा सेंटर से MSME तक पर सरकार का फोकस
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में निवेशक राउंडटेबल में भारत की आर्थिक रणनीति पर बात की। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और डेटा सेंटर, MSME ऋण, निवेश माहौल और राजकोषीय अनुशासन को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण और बुनियादी ढांचे के विस्तार के जरिए उद्योगों को लगातार सहयोग देना सरकार की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह बात न्यूयॉर्क में आयोजित एक उच्चस्तरीय निवेशक राउंडटेबल को संबोधित करते हुए कही।
भारतीय महावाणिज्य दूतावास और बैंक ऑफ अमेरिका के सहयोग से आयोजित इस बिजनेस राउंडटेबल में वित्त मंत्री ने भारत में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए विभिन्न नीतिगत कदमों की जानकारी दी।
AI और डेटा सेंटर से लेकर MSME तक पर जोर
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सरकार का फोकस पूंजीगत निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ विमानन क्षेत्र के विकास पर भी है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटरों को बढ़ावा देने, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने तथा MSME क्षेत्र के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी NPA को कम करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक, इन प्रयासों से बैंकों और उद्योगों के लिए कारोबार बढ़ाने, विस्तार करने और निवेश को आगे बढ़ाने का माहौल बेहतर हुआ है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 7.8% GDP ग्रोथ
सीतारमण ने वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले देशों में बना हुआ है।
वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि का हवाला देते हुए इसे अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया।
आर्थिक सुधारों से बढ़ी नियामकीय स्पष्टता
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण आर्थिक और नियामकीय सुधार किए हैं। इनमें दिवाला और दिवालियापन संहिता जैसे सुधार भी शामिल हैं।
उनके मुताबिक, इन कदमों का उद्देश्य कारोबार के लिए नियमों को अधिक स्पष्ट बनाना, अनुपालन प्रक्रिया को आसान करना और अनावश्यक प्रशासनिक कागजी कार्रवाई को कम करना रहा है।
राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का जोर
सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगातार कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद भारत ने राजकोषीय विवेक और अनुशासन की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है।
उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू निवेश माहौल तैयार करने में केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रिय भूमिका रही है। राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी पहल
वित्त मंत्री ने कहा कि पूंजी निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, MSME वित्तपोषण और निवेश को बढ़ावा देने से जुड़ी सरकार की पहल विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप हैं।
कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी भारत की आर्थिक स्थिति पर बात रखी। उन्होंने हाल में जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों को भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती का संकेत बताया।
क्वात्रा ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। इसके लिए भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत है।
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