पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, बोले- जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई दान नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर संस्कृत का प्रेरक सुभाषित साझा किया, जिसमें भय दूर करने और जीवन की रक्षा को सबसे बड़ा दान बताया गया है।

Sep 02, 2026 - 09:52
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पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, बोले- जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई दान नहीं

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत का एक प्रेरणादायक सुभाषित साझा किया। इस श्लोक में दूसरों के भय को दूर करने और जीवन की रक्षा को सबसे महत्वपूर्ण दान बताया गया है।

प्रधानमंत्री ने लिखा— “अभयस्यैव यो दाता तस्यैव सुमहत्फलम्। न हि प्राणसमं दानं त्रिषु लोकेषु विद्यते॥”

इसका भावार्थ है कि जो व्यक्ति किसी को भय से मुक्त करता है, उसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। तीनों लोकों में किसी के प्राणों की रक्षा करने से बड़ा कोई दान नहीं माना गया है।

लगातार संस्कृत सुभाषित साझा कर रहे हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर संस्कृत के अलग-अलग सुभाषित और उनके भावार्थ साझा कर रहे हैं। इन श्लोकों के माध्यम से वे जीवन, व्यवहार, विचार, संयम और अच्छे कर्मों से जुड़े संदेश लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

मंगलवार को भी उन्होंने एक संस्कृत श्लोक पोस्ट किया था— “यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥”

इसका भाव यह है कि जो व्यक्ति अपनी योजनाओं और कार्यों को तब तक दूसरों से गोपनीय रखता है, जब तक वे सफलतापूर्वक पूरे न हो जाएं, वही वास्तविक अर्थों में विवेकशील और बुद्धिमान माना जाता है।

अच्छे विचारों के महत्व पर भी दिया था संदेश

सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक अन्य सुभाषित साझा किया था। इसमें बताया गया था कि व्यक्ति जिस विषय के बारे में लगातार सोचता रहता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी दिशा में झुकने लगता है।

इस संदेश के जरिए शुभ, सकारात्मक और कल्याणकारी विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दी गई थी।

28 अगस्त को रक्षा सूत्र से जुड़ा श्लोक किया था पोस्ट

इससे पहले 28 अगस्त को पीएम मोदी ने रक्षा सूत्र के महत्व से जुड़ा संस्कृत श्लोक साझा किया था। इसमें रक्षा सूत्र को विजय, सुख, संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि से जोड़ते हुए उसके प्रभाव का वर्णन किया गया था।

परंपरा और श्रेष्ठ कर्मों का भी दिया संदेश

27 अगस्त को प्रधानमंत्री की ओर से साझा किए गए संदेश में लोगों को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने की प्रेरणा दी गई थी। साथ ही न्यायपूर्ण मार्ग पर चलने, श्रेष्ठ लोगों के आचरण से सीख लेने और अच्छे गुणों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया था।

प्रधानमंत्री की इन पोस्ट के जरिए संस्कृत के प्राचीन ज्ञान और भारतीय परंपरा से जुड़े विचारों को आधुनिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास नजर आता है।

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