संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, CJI टिप्पणी विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को CJI सूर्यकांत के खिलाफ कथित टिप्पणियों से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। जानें अदालत की टिप्पणी, निखिल वागले की माफी और मतदाता सूची के SIR मामले से जुड़े घटनाक्रम।
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को कथित टिप्पणियों के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ कथित बयानों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इन टिप्पणियों को लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दोनों से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। फिलहाल अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है।
CJI पर टिप्पणियों को लेकर विवाद
यह विवाद उस घटनाक्रम के बाद सामने आया, जब CJI सूर्यकांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। दोनों नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
CJI ने कथित तौर पर कहा था कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए इस तरह की बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा। यह सिद्धांत संविधान की मूल संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
12 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने दावा किया था कि उन्होंने CJI समेत 60 से 70 न्यायाधीशों को लंदन में भाजपा नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते देखा था। वहीं, निखिल वागले ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच X पर CJI के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की थी।
SCBA ने अवमानना की कार्यवाही की मांग क्यों की?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत को बताया कि संगठन इस तरह की कार्यवाही शुरू करने के पक्ष में सहज नहीं था, लेकिन उसे लगा कि ऐसी टिप्पणियों को नजरअंदाज करने से दूसरे लोगों को भी इसी तरह के बयान देने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कई बार लोग यह नहीं समझ पाते कि उन्हें उकसाने वाले लोग उन्हें किसी जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में पीछे नहीं रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों को इस विषय की वास्तविकता समझ आएगी।
निखिल वागले ने मांगी बिना शर्त माफी
इस मामले में एक अन्य घटनाक्रम के तहत निखिल वागले ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर बताया कि उन्होंने विवादित पोस्ट हटा दी है। उन्होंने CJI और सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी।
वागले ने अपने पत्र में कहा कि उनकी पोस्ट व्यवस्था से उपजी निराशा और भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम थी। उन्होंने अपनी भाषा पर खेद जताते हुए स्पष्ट किया कि वह अपनी टिप्पणी को उचित ठहराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
मतदाता सूची संशोधन मामले में भी राउत की याचिका
इस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत से उनके आचरण के संबंध में अलग से स्पष्टीकरण भी मांगा। यह घटनाक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है।
राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं ने 12 अक्टूबर को अदालत का रुख करते हुए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। अदालत ने संबंधित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए 27 अक्टूबर तक का समय दिया और मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।
राउत की याचिका को भी उनके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने की शर्त पर अस्थायी रूप से स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है।
न्यायपालिका की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ लोग यह सोचकर जानबूझकर टिप्पणियां करते हैं कि इससे न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी।
फिलहाल, राउत और वागले के खिलाफ जारी नोटिस कारण बताओ प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि अदालत ने उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी ठहरा दिया है। आगे की कार्यवाही उनके जवाब और अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।
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