ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंध, कई बैंक और कंपनियां निशाने पर

ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने तेल कारोबार, वित्तीय लेन-देन और कथित धन हस्तांतरण नेटवर्कों पर आरोप लगाए हैं। क्यूबा के एक सरकारी बैंक पर भी अलग से कार्रवाई की गई है।

Oct 16, 2026 - 09:44
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ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंध, कई बैंक और कंपनियां निशाने पर

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई में इराक, दुबई, हांगकांग और ईरान से जुड़े वित्तीय तथा कारोबारी नेटवर्कों को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा, अमेरिका ने क्यूबा के एक सरकारी बैंक पर भी अलग से प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन नेटवर्कों के माध्यम से ईरान से जुड़े कारोबारियों और संस्थाओं ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों से बचते हुए बड़े पैमाने पर धन का लेन-देन किया। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव जारी रहेगा और उसकी सैन्य गतिविधियों को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाले रास्तों को बंद करने के प्रयास किए जाएंगे।

सैकड़ों मिलियन डॉलर के वित्तीय लेन-देन का आरोप

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ईरान से जुड़े कुछ कारोबारी नेटवर्क मध्य पूर्व और एशिया में शेल कंपनियों तथा विदेशी मुद्रा कारोबारियों के माध्यम से सैकड़ों मिलियन डॉलर के लेन-देन में शामिल रहे हैं।

प्रतिबंधों की सूची में सैयद रूहोल्लाह रजावी का नाम भी शामिल बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह दुबई में रहकर ईरान के तेल कारोबार से जुड़े नेटवर्क में सक्रिय रहे हैं। अधिकारियों का आरोप है कि इन नेटवर्कों के जरिए तेल की बिक्री से प्राप्त धन को विभिन्न देशों में स्थानांतरित किया जाता था।

अमेरिकी पक्ष का दावा है कि हांगकांग से यूएई और तुर्किये तक धन पहुंचाने के लिए विभिन्न कारोबारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया। आरोपों के अनुसार, कुछ रकम को सोने और नकदी में बदलने के बाद ईरान तथा उससे जुड़े समूहों तक पहुंचाया जाता था। अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्रक्रिया में माहान एयर की उड़ानों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है।

इन आरोपों और संबंधित लेन-देन के स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

किन बैंकों और कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से घोषित कार्रवाई में कई वित्तीय संस्थाओं और कारोबारी इकाइयों को शामिल किया गया है।

- एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड: हांगकांग स्थित इस कंपनी पर ईरान के शहर बैंक से जुड़े नेटवर्क के लिए वित्तीय लेन-देन करने का आरोप लगाया गया है।

- सादेघ बावी: दुबई में रहने वाले ईरानी-डोमिनिकन नागरिक पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स से जुड़ी गतिविधियों में सहायता करने का आरोप है।

- इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक फॉर इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस: इराक स्थित इस बैंक पर ईरान को अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।

- जजीरेह इंटरनेशनल बैंक कंपनी: ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्कों के संदर्भ में इस ऑफशोर बैंक को प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है।

- चाबहार इंटरनेशनल बैंक ओवरसीज कंपनी: इस बैंक पर भी अमेरिकी कार्रवाई की घोषणा की गई है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन वित्तीय रास्तों को बाधित करना है, जिनके माध्यम से ईरान कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है।

क्यूबा के सरकारी बैंक पर भी अमेरिकी प्रतिबंध

ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्कों पर कार्रवाई के अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के सरकारी बैंक बैंको इंटरनेशनल डी कॉमर्सियो एस.ए. (BICSA) के खिलाफ भी प्रतिबंधों की घोषणा की।

रुबियो के मुताबिक, यह बैंक वर्ष 2022 से ईरान के पहले से प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रहा था। अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता के रूप में पेश किया है।

रुबियो ने क्यूबा पर आरोप लगाया कि वहां ऐसे देशों और संगठनों से संबंधित गतिविधियों को जगह मिलती रही है, जिन्हें अमेरिका अपने लिए सुरक्षा चुनौती मानता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी क्षेत्र के निकट विदेशी सैन्य, खुफिया या आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाएगा।

विदेशी बैंकों को द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अन्य देशों के वित्तीय संस्थानों को भी चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार, यदि किसी विदेशी बैंक या वित्तीय संस्था के संबंध प्रतिबंधित व्यक्तियों अथवा संगठनों से पाए जाते हैं, तो उस पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इस तरह की कार्रवाई को द्वितीयक प्रतिबंध कहा जाता है। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करने वाले विदेशी पक्षों पर भी दबाव बनाना है।

अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क (FinCEN) ने भी बैंकों को संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से ऐसे वित्तीय लेन-देन की रिपोर्ट करने को कहा गया है, जिनमें धार्मिक चैरिटी नेटवर्कों के कथित दुरुपयोग की आशंका हो।

अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता जताई है कि खुम्स जैसे धार्मिक योगदानों का इस्तेमाल निर्धारित धार्मिक या सामाजिक उद्देश्यों से अलग गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष लेन-देन या संस्था के बारे में निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और जांच पर निर्भर करेगा।

धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से वित्तपोषण रोकने पर जोर

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ईरानी सरकार को धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके आर्थिक लाभ हासिल करने या आतंकवाद के वित्तपोषण की अनुमति नहीं देना चाहता।

प्रशासन का तर्क है कि वित्तीय निगरानी और प्रतिबंधों के जरिए उन नेटवर्कों की पहचान की जा सकती है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने या प्रतिबंधित गतिविधियों को आर्थिक सहायता देने का संदेह है।

इस नीति का असर केवल ईरान में स्थित संस्थाओं तक सीमित नहीं रह सकता। यदि विदेशी बैंक, कारोबारी समूह या अन्य वित्तीय संस्थाएं प्रतिबंधित नेटवर्कों से जुड़ी पाई जाती हैं, तो उन्हें भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत कार्रवाई

उपलब्ध विवरण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने 24 अगस्त को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया था। इस अभियान का घोषित उद्देश्य ईरान से जुड़े उन वित्तीय और कारोबारी नेटवर्कों पर कार्रवाई करना है, जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने का आरोप है।

इससे पहले भी अमेरिका ईरान से संबंधित नेटवर्कों के खिलाफ यूएई, हांगकांग, चीन और अन्य क्षेत्रों में प्रतिबंधात्मक कदम उठा चुका है। नई कार्रवाई उसी व्यापक नीति का हिस्सा बताई गई है, जिसके तहत तेल कारोबार, वित्तीय लेन-देन और कथित धन हस्तांतरण के रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

ईरान की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर संभावित असर

नए प्रतिबंधों से ईरान से जुड़े कारोबारियों, बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के लिए लेन-देन करना अधिक जटिल हो सकता है। विदेशी बैंकों के सामने भी यह सुनिश्चित करने की चुनौती रहेगी कि उनके माध्यम से प्रतिबंधित संस्थाओं तक धन न पहुंचे।

हालांकि, इन उपायों का वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रतिबंधित नेटवर्कों का कारोबार कितना प्रभावित होता है, अन्य देश किस हद तक अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हैं और संबंधित संस्थाएं वैकल्पिक वित्तीय रास्तों का इस्तेमाल कर पाती हैं या नहीं।

अमेरिका की ताजा कार्रवाई से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए वित्तीय संस्थाओं, तेल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण के नेटवर्कों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस नीति का आगे क्या असर होगा, यह आने वाले समय में प्रतिबंधों के क्रियान्वयन और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया से तय होगा।

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