भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 हुई, सुखना और सौज झील शामिल
भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण की दिशा में नई उपलब्धि दर्ज हुई है। चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे जैव विविधता, जलवायु सुरक्षा और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण बताया।
भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किए जाने के साथ देश में इन स्थलों की कुल संख्या 103 हो गई है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भारत आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा में अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने आर्द्रभूमियों के संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि इनके संरक्षण से जैव विविधता को सुरक्षित रखने, जल संसाधनों की रक्षा करने और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। इसके साथ ही आर्द्रभूमियां स्थानीय समुदायों की आजीविका को सहारा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को रामसर सूची में शामिल किया जाना भारत के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। इन क्षेत्रों से मिलने वाले पर्यावरणीय, जलवायु और आजीविका संबंधी लाभों को बनाए रखना भी इस दिशा में अहम है।
चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश को दी बधाई
भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश को बधाई दी। साथ ही उन्होंने पर्यटकों से सुखना और सौज झील की प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए इन स्थलों की यात्रा करने का आग्रह किया।
रामसर स्थलों की सूची में शामिल होना आर्द्रभूमियों के महत्व को रेखांकित करता है और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। इन पारिस्थितिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर्यावरण संतुलन और स्थानीय समुदायों के हितों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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