भारत-फ्रांस नौसैनिक अभ्यास ‘वरुण’ का 24वां संस्करण, INS त्रिशूल ने फ्रांस में दिखाया दम
भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘वरुण’ का 24वां संस्करण फ्रांस के टूलॉन में आयोजित हुआ। भारतीय नौसेना का INS त्रिशूल फ्रांसीसी नौसेना की विभिन्न इकाइयों के साथ समुद्री अभ्यास में शामिल हुआ, जिसमें परिचालन तालमेल और आपसी समझ बढ़ाने पर जोर रहा।
नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से जारी समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाते हुए द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘वरुण’ का 24वां संस्करण आयोजित किया गया। भारतीय नौसेना का अग्रिम युद्धपोत INS त्रिशूल 22 सितंबर को फ्रांस के टूलॉन पहुंचा, जहां उसने फ्रांसीसी नौसेना के साथ अभ्यास में हिस्सा लिया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में बंदरगाह और समुद्र दोनों स्तरों पर पेशेवर गतिविधियां आयोजित की गईं।
समुद्री अभियानों में बढ़ा तालमेल
अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन संबंधी गतिविधियों, क्रॉस-डेक विजिट और विभिन्न पेशेवर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं को अपने परिचालन अनुभव और कार्यप्रणालियां साझा करने का अवसर देना था।
समुद्री चरण में दोनों पक्षों ने विभिन्न प्रकार के नौसैनिक अभियानों का अभ्यास किया। इनमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ अभियान और फायरिंग अभ्यास जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। इन अभ्यासों से दोनों नौसेनाओं के बीच संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता और परिचालन तालमेल को बेहतर करने पर ध्यान दिया गया।
हेलीकॉप्टर और समुद्री गश्ती विमान भी शामिल
अभ्यास में फ्रांसीसी नौसेना के NH-90 हेलीकॉप्टरों और Atlantique-2 समुद्री गश्ती विमानों ने भी भाग लिया। दोनों नौसेनाओं के हेलीकॉप्टरों के एक-दूसरे के युद्धपोतों पर उतरने की गतिविधियां भी की गईं।
इस तरह की गतिविधियों के जरिए दोनों पक्षों ने समुद्र में संचार, संचालन और समन्वय से जुड़े तौर-तरीकों को करीब से समझने का अवसर हासिल किया।
टूलॉन में हुआ स्वागत
INS त्रिशूल के टूलॉन पहुंचने पर फ्रांसीसी नौसेना की ओर से उसका स्वागत किया गया। बंदरगाह चरण के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों और जवानों के बीच पेशेवर बातचीत के साथ खेल एवं अन्य मैत्रीपूर्ण गतिविधियां भी हुईं।
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के कार्यक्रम दोनों नौसेनाओं के बीच अनुभव साझा करने, बेहतर अंतर-संचालन क्षमता विकसित करने और आपसी समझ मजबूत करने में मदद करते हैं।
फ्रांसीसी युद्धपोतों का किया दौरा
अभ्यास के दौरान भारतीय नौसैनिकों को फ्रांसीसी नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों की कार्यप्रणाली को करीब से देखने का अवसर मिला। भारतीय दल ने फ्रांसीसी युद्धपोतों पर जाकर विमानन सुविधाओं, संचालन प्रक्रियाओं और समुद्री अभियानों से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा।
दोनों देशों के नौसैनिकों ने अपने-अपने परिचालन अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं। इसका उद्देश्य भविष्य में संयुक्त समुद्री अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से भी मजबूत हुई दोस्ती
टूलॉन में INS त्रिशूल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें फ्रांसीसी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय गणमान्य लोगों ने भाग लिया। दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
इन कार्यक्रमों ने सैन्य सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का अवसर दिया।
शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि
फ्रांस यात्रा के दौरान INS त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर, अधिकारियों और जवानों ने मार्सेय के मजार्ग युद्ध स्मारक पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को याद किया गया।
यह कार्यक्रम भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक सैन्य संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी को भी सामने लाता है।
भारत-फ्रांस समुद्री सहयोग को मिला नया आयाम
अभ्यास ‘वरुण’ भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच नियमित समुद्री सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2026 में इसका 24वां संस्करण आयोजित किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग के दायरे को बढ़ाने और परिचालन संबंधों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
INS त्रिशूल की टूलॉन यात्रा और वरुण अभ्यास के जरिए दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र में अनुभव साझा करने, परिचालन प्रक्रियाओं को समझने और भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।
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