BRICS Summit 2026: नई दिल्ली सम्मेलन से दुनिया में मजबूत हुआ भारत का कद, मोदी नेतृत्व में ग्लोबल साउथ को नई आवाज

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। New Delhi Declaration पर सर्वसम्मति, ग्लोबल साउथ पर फोकस, व्यावहारिक सहयोग और BRICS Bharat Innovates में भारतीय तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियां रहीं।

Sep 14, 2026 - 18:29
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली सम्मेलन से दुनिया में मजबूत हुआ भारत का कद, मोदी नेतृत्व में ग्लोबल साउथ को नई आवाज

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ-साथ उसकी कूटनीतिक क्षमता को प्रदर्शित करने वाला अहम आयोजन रहा। ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक चुनौतियों और बदलती वैश्विक व्यवस्था से गुजर रही है, भारत ने BRICS की अध्यक्षता को केवल एक औपचारिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखा। सम्मेलन के जरिए संवाद, सहयोग और साझा विकास के लिए नए अवसरों को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।

सर्वसम्मति से अपनाया गया नई दिल्ली घोषणापत्र

नई दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन में BRICS नेताओं ने ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ की थीम के अनुरूप विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में New Delhi Declaration का सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाना रहा।

विस्तारित BRICS में अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं वाले 11 देश शामिल हैं। ऐसे विविध समूह के बीच साझा दस्तावेज पर सहमति बनना भारत की अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा गया।

सिर्फ चर्चा नहीं, व्यावहारिक सहयोग पर फोकस

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान BRICS के एजेंडे को व्यावहारिक सहयोग और विकास से जोड़ने पर जोर दिया। अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन बैठकों में कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, सतत जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान और नवाचार जैसे विषयों पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके पीछे उद्देश्य वैश्विक सहयोग को आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव से जोड़ना रहा।

दुनिया की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व

वर्तमान BRICS समूह का वैश्विक प्रभाव भी इसके महत्व को दर्शाता है। 11 सदस्यीय समूह दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

ऐसे प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता ने भारत को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक विमर्श में अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर दिया।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की कोशिश

भारत ने BRICS के मंच से विकासशील देशों की समस्याओं और प्राथमिकताओं को प्रमुखता देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूह को अधिक समावेशी और विकास केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ के लिए व्यावहारिक समाधान और सहयोग के अवसरों को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। इससे भारत की उस विदेश नीति की झलक भी मिलती है, जिसमें वह विकासशील देशों के साथ साझेदारी और उनकी चिंताओं को वैश्विक मंचों पर रखने पर जोर देता है।

BRICS Bharat Innovates में दिखी भारत की तकनीकी क्षमता

BRICS Summit के दौरान भारत ने केवल कूटनीतिक और आर्थिक एजेंडा ही प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि अपनी तकनीकी और नवाचार क्षमता का भी प्रदर्शन किया।

BRICS Bharat Innovates Exposition में 37 भारतीय डीप-टेक नवाचारकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इसके जरिए भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने के साथ-साथ तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की क्षमता भी रखता है।

द्विपक्षीय बैठकों से मजबूत हुए रणनीतिक संबंध

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। रूस, चीन, ईरान, मलेशिया और अन्य देशों के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों तथा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

इन मुलाकातों ने भारत को अलग-अलग देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। इससे यह भी संकेत मिला कि भारत बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ द्विपक्षीय कूटनीति को भी समान महत्व दे रहा है।

विविध BRICS को साझा एजेंडे पर लाने की चुनौती

BRICS का विस्तार होने के साथ समूह पहले से अधिक विविध हो गया है। एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के देशों की भागीदारी ने संगठन के भौगोलिक और आर्थिक प्रभाव को व्यापक बनाया है।

इतने अलग-अलग हितों वाले देशों को साझा एजेंडे पर लाने के लिए लगातार संवाद और सहमति निर्माण जरूरी है। भारत की अध्यक्षता में इसी दिशा में प्रयास किए गए और साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का रास्ता तलाशा गया।

घरेलू विकास को वैश्विक सहयोग से जोड़ा

भारत ने अपनी घरेलू विकास यात्रा को भी BRICS के व्यापक एजेंडे से जोड़ने की कोशिश की। डिजिटल परिवर्तन, नवाचार, वित्तीय समावेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भारत के अनुभव को विकासशील देशों के साथ साझा करने पर जोर दिया गया।

भारत का उद्देश्य ऐसे समाधान और मॉडल सामने रखना रहा जिन्हें अलग-अलग देशों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सके।

‘विश्व बंधु’ की भावना का संदेश

नई दिल्ली BRICS सम्मेलन के जरिए भारत ने सहयोग और साझा जिम्मेदारी की भावना को भी प्रमुखता दी। संदेश यह रहा कि वैश्विक चुनौतियों का सामना केवल टकराव के जरिए नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग के माध्यम से किया जा सकता है।

भारत की ‘विश्व बंधु’ की सोच इसी व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें विकास और वैश्विक शांति के लिए देशों के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका

नई दिल्ली में आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं रहा। नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति, सहयोग के व्यापक एजेंडे, ग्लोबल साउथ पर फोकस और भारतीय नवाचार के प्रदर्शन ने भारत की बढ़ती वैश्विक सक्रियता को सामने रखा।

BRICS की अध्यक्षता के दौरान भारत ने कूटनीति, आर्थिक सहयोग, तकनीक और विकास से जुड़े मुद्दों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की। यह भारत की उस दीर्घकालिक भूमिका की ओर भी संकेत करता है, जिसमें वह वैश्विक मंचों पर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली भागीदार बनना चाहता है।

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में अहम पड़ाव

BRICS Summit 2026 भारत की ‘विकसित भारत’ की व्यापक यात्रा से भी जुड़ा हुआ नजर आया। घरेलू स्तर पर डिजिटल और तकनीकी विकास के साथ वैश्विक स्तर पर सहयोग, समावेशी विकास और संतुलित विश्व व्यवस्था की दिशा में भारत की सक्रियता इस सम्मेलन की प्रमुख विशेषताओं में रही।

नई दिल्ली सम्मेलन ने यह संदेश मजबूत किया कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी आर्थिक और रणनीतिक क्षमता के साथ-साथ सहयोग, संवाद और साझा विकास के विचार को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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