IMF प्रमुख जॉर्जीवा की चेतावनी: महंगाई, महंगा कर्ज और AI निवेश बने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम
IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बनी महंगाई, बढ़ती कर्ज चुकाने की लागत और AI निवेश से जुड़े वित्तीय जोखिमों पर चिंता जताई है। हालांकि, उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अब तक की मजबूती को उम्मीद से बेहतर बताया।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि लगातार बनी हुई महंगाई, बढ़ती कर्ज चुकाने की लागत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से बढ़ रहा निवेश आने वाले समय में आर्थिक जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि, जॉर्जीवा ने यह भी कहा कि अब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई बड़े झटकों के बावजूद उम्मीद से बेहतर मजबूती दिखाई है।
महंगाई पर अभी राहत की उम्मीद कम
न्यूयॉर्क में आयोजित एक आर्थिक कार्यक्रम में जॉर्जीवा ने कहा कि कई देशों में महंगाई की समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, महंगाई के दबाव को कम करने की प्रक्रिया कई जगह धीमी पड़ी है, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती बनी हुई है।
IMF ने भी जुलाई 2026 के अपने अपडेट में कहा था कि वैश्विक महंगाई में गिरावट की प्रक्रिया रुक गई है। संगठन ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि करीब 3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
महंगे कर्ज से सरकारों पर बढ़ा दबाव
जॉर्जीवा ने बढ़ती ब्याज दरों और कर्ज चुकाने की लागत को भी बड़ी चिंता बताया। ऊंची उधारी लागत का असर खासतौर पर उन देशों पर पड़ सकता है, जिनकी वित्तीय स्थिति पहले से दबाव में है।
IMF के मुताबिक, दुनिया भर में सार्वजनिक कर्ज अब वैश्विक GDP के लगभग 100 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है और आगे भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सरकारों के लिए बजट घाटे को नियंत्रित करना और वित्तीय गुंजाइश बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
AI निवेश में तेजी, लेकिन वित्तीय जोखिम भी
जॉर्जीवा ने AI में हो रहे बड़े पैमाने के निवेश को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अवसर के साथ-साथ संभावित जोखिम भी बताया। खास चिंता ऐसे निवेशों को लेकर है, जिनमें कंपनियां ज्यादा कर्ज ले रही हैं या एक-दूसरे से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं के जरिए पूंजी जुटा रही हैं।
IMF ने हालिया विश्लेषण में AI निवेश से जुड़े बढ़ते लीवरेज और ‘सर्कुलर फाइनेंसिंग’ को वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित जोखिम बताया है। यदि AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई या निवेश से जुड़ी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं, तो बाजार में तेज गिरावट का दबाव बन सकता है।
AI को लेकर ज्यादा उम्मीदें भी बन सकती हैं चुनौती
जॉर्जीवा ने AI को लेकर बनी अत्यधिक उम्मीदों पर भी सावधानी बरतने की बात कही। यदि तकनीक से जुड़े अनुमानित आर्थिक लाभ अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं आते हैं, तो निवेशकों में निराशा पैदा हो सकती है और इसका असर वित्तीय बाजारों तक पहुंच सकता है।
हालांकि, IMF का आकलन यह भी है कि लंबे समय में AI उत्पादकता और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है। जॉर्जीवा के अनुसार, AI से वैश्विक संभावित विकास दर में लंबे समय में 0.1 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती
इन जोखिमों के बावजूद IMF प्रमुख ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अब तक की मजबूती को सकारात्मक संकेत बताया। IMF के सितंबर के आकलन में भी कहा गया है कि 2026 की वैश्विक वृद्धि का अनुमान करीब 3 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है और अर्थव्यवस्था ने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े झटकों को अपेक्षा से बेहतर तरीके से संभाला है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में आर्थिक और भू-राजनीतिक विभाजन बढ़ने की चर्चा के बावजूद देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन के स्तर पर देशों की पारस्परिक निर्भरता अभी भी महत्वपूर्ण है।
जॉर्जीवा ने मौजूदा परिस्थितियों में सावधानी बरतने पर जोर देते हुए कहा कि जोखिम का स्तर ऊंचा है और अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई सामान्य स्थिति बनती जा रही है।
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