भारत की अपील: खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष खत्म हो, भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। भारत ने खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों, समुद्री व्यापार, नाविकों की सुरक्षा और फिलिस्तीन के स्थायी समाधान को महत्वपूर्ण बताया।

Oct 16, 2026 - 10:40
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भारत की अपील: खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष खत्म हो, भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो

भारत ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष को तत्काल समाप्त करने की अपील करते हुए बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि क्षेत्र में जारी तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक, निवेश, ऊर्जा और लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं। ऐसे में संघर्ष को समाप्त करने और तनाव कम करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

खाड़ी देशों के साथ भारत के आर्थिक हित

पी. हरीश ने बताया कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह सदस्य देशों के साथ भारत का सालाना व्यापार करीब 180 अरब डॉलर है। इन देशों से भारत में लगभग 31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आता है, जबकि वहां रहने वाले लोगों से भारत को मिलने वाला धन यानी रेमिटेंस 52 अरब डॉलर से अधिक है।

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इन नागरिकों की भलाई भारत और संबंधित देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा है।

समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता

भारत ने समुद्री मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया। हरीश के अनुसार, वाणिज्यिक जहाजों या उनके चालक दल पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता और व्यापारिक गतिविधियों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने भारतीय ध्वज वाले जहाज एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी पर इस सप्ताह हुए हमले का उल्लेख किया। साथ ही हाल के सप्ताहों में अन्य देशों के ध्वज वाले जहाजों—एमटी पेट्रो डॉल्फिन, एमटी वाल्थेरा, एमटी ऑन पीस और एमटी काजिमाह III—पर हुए हमलों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, इन जहाजों पर कई भारतीय नाविक सवार थे।

हरीश ने संकट की स्थिति में नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता के लिए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का आभार जताया। उन्होंने अपने बयान में इन हमलों के लिए किसी विशेष पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

आपात स्थिति में नाविकों की मदद के लिए नेटवर्क का प्रस्ताव

नाविकों की सुरक्षा और आपात परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क (SESN) बनाने का प्रस्ताव रखा था।

पी. हरीश ने बताया कि इस नेटवर्क के माध्यम से संबंधित देशों के समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इससे आपात संदेश भेजने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, नाविकों को उनके परिवारों से संपर्क कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा पर केंद्रित मित्र देशों का एक समूह भी शुरू किया है। हरीश के अनुसार, इस समूह में 23 देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य समुद्री जहाजों पर हमलों की पुनरावृत्ति रोकने और नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना है।

होर्मुज संकट के बीच फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी भारत की चिंता

भारत ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के कारण फिलिस्तीन की गंभीर मानवीय स्थिति से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान नहीं हटना चाहिए।

पी. हरीश ने 7 अक्टूबर को हुए हमले की भारत की निंदा दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संघर्ष के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिकों की जान बचाने और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान से बचाने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।

दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीन को भारत की सहायता

भारत ने फिलिस्तीन मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए मानवीय सहायता, बातचीत और कूटनीति का समर्थन दोहराया। पी. हरीश ने कहा कि भारत ऐसे समझौते के पक्ष में है, जिसके तहत इजरायल और फिलिस्तीन स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में शांतिपूर्वक साथ रह सकें। इस व्यवस्था को दो-राष्ट्र समाधान कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि भारत अस्पतालों के निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के माध्यम से फिलिस्तीन के लोगों की सहायता कर रहा है। इसके अतिरिक्त, भारत ने संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को कुल 5.2 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है।

भारत के बयान में क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने, भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा फिलिस्तीन के मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने पर एक साथ जोर दिया गया।

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