भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौते, युवा पेशेवरों से लेकर तकनीक और स्टार्टअप तक सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की बैठक के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने टिकाऊ परिवहन, युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, नवाचार, तकनीक हस्तांतरण और उद्यमिता से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
भारत और स्विट्जरलैंड ने सोमवार को विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU), आशय पत्र (LoI) और कार्यान्वयन व्यवस्था पर सहमति जताई। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।
इन समझौतों में युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान, टिकाऊ परिवहन और बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्यमिता जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
युवा पेशेवरों को मिलेगा दूसरे देश में काम का अवसर
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान (YPS) को लेकर हुए समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के युवाओं को सीमित अवधि के लिए दूसरे देश में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है।
इस व्यवस्था से युवा अपने पेशेवर अनुभव के साथ-साथ भाषा और कार्य संस्कृति से जुड़े कौशल भी विकसित कर सकेंगे। समझौते के तहत प्रत्येक देश से हर वर्ष 300 युवा पेशेवरों को शामिल किया जा सकेगा। आवश्यकता के अनुसार यह संख्या बढ़ाकर 500 तक किए जाने का प्रावधान भी है।
समझौते में प्रतिभागियों की राष्ट्रीयता और निवास स्थिति के सत्यापन से जुड़े प्रावधान भी रखे गए हैं। इसके लिए 30 से 90 दिनों तक की अलग-अलग समयसीमा निर्धारित की गई है।
टिकाऊ परिवहन और बुनियादी ढांचे पर सहयोग
दोनों देशों ने परिवहन प्रौद्योगिकियों के संवर्धन और सहयोग से जुड़े समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य टिकाऊ और आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास में दोनों देशों की विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना है।
इसके दायरे में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सुरंग निर्माण, चक्रीय अर्थव्यवस्था और परिवहन एवं आवाजाही से संबंधित अन्य तकनीकें शामिल हैं। इस सहयोग से टिकाऊ परिवहन प्रणालियों के विकास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
भारत और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक समुदायों के बीच सहयोग
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच आशय पत्र पर भी सहमति बनी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच लंबे समय के सहयोग के लिए ढांचा तैयार करना है।
इसके तहत शुरुआती स्तर के वैज्ञानिक सहयोग, भविष्य की संयुक्त शोध साझेदारियों और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए अवसर विकसित किए जाएंगे।
स्टार्टअप और तकनीक हस्तांतरण को मिलेगा बढ़ावा
भारत और स्विट्जरलैंड ने नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक कार्यान्वयन व्यवस्था भी तय की है।
इसके अंतर्गत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training (AIT India) कार्यक्रम लागू किया जाएगा। कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाएं, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
इसका उद्देश्य अकादमिक संस्थानों, उद्योग और शुरुआती चरण के उद्यमों के बीच संपर्क को मजबूत करना है।
स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष में संयुक्त शोध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए संयुक्त अनुसंधान प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने भारत के विज्ञान आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता बढ़ाने से जुड़े ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते का भी स्वागत किया। इससे शोध और नवाचार को व्यावसायिक उपयोग तथा स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं।
7 अक्टूबर को होगा India-EFTA Prosperity Summit
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के कारोबारी नेताओं के साथ 7 अक्टूबर को Prosperity Summit आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, यह सम्मेलन भारत-EFTA व्यापार और निवेश संबंधों में मौजूद संभावनाओं को ठोस सहयोग और परिणामों में बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा।
EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। भारत और EFTA के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लागू होने के बाद आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर भी दोनों पक्षों का ध्यान है।
कुल मिलाकर, भारत-स्विट्जरलैंड की मौजूदा बैठक में आर्थिक संबंधों के साथ-साथ युवा, विज्ञान, तकनीक, परिवहन, स्टार्टअप और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया।
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