निर्यातकों को बड़ी राहत, सरकार ने RELIEF योजना के दूसरे घटक की समय-सीमा बढ़ाई
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन पर इसके असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने RELIEF योजना के Component-II की समय-सीमा बढ़ा दी है। इसके तहत पात्र निर्यातकों को ECGC से 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ मिलता है।
केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री लॉजिस्टिक्स पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए भारतीय निर्यातकों के लिए राहत बढ़ाई है। वाणिज्य विभाग ने Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation (RELIEF) के Component-II की समय-सीमा में विस्तार किया है। यह पहल Export Promotion Mission के तहत लागू की जा रही है।
सरकार के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में व्यवधान के बीच निर्यात गतिविधियों को बनाए रखना और कारोबारियों को बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स तथा व्यापारिक जोखिमों से निपटने में मदद करना है।
ECGC कवर पर मिलेगा 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज
RELIEF के दूसरे घटक के तहत निर्धारित क्षेत्रों में आगामी निर्यात शिपमेंट के लिए निर्यातकों को ECGC कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज उपलब्ध कराया जाता है।
यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई पात्र Stand Alone Policies और Whole Turnover Policies पर लागू होती है। योजना के तहत FCL, LCL और Reefer Container जैसे कार्गो को कवर किया जाता है, हालांकि ऊर्जा शिपमेंट इससे बाहर हैं।
प्रीमियम में बढ़ोतरी से भी राहत
सरकार ने बताया कि Component-II के तहत पात्र अवधि के दौरान निर्यातकों पर पड़ने वाले ECGC प्रीमियम को व्यवधान से पहले के स्तर से ऊपर नहीं बढ़ाया जाएगा। इससे उन निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा मिलती है जो पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में बढ़े जोखिम के बीच अपना कारोबार जारी रख रहे हैं।
मार्च में शुरू हुई थी RELIEF योजना
RELIEF पहल को 19 मार्च 2026 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधान के कारण असाधारण रूप से बढ़ी माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता देना था।
इससे पहले जून 2026 में भी Component-II की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था। अब सरकार ने 30 सितंबर की पिछली समय-सीमा के बाद भी इस सहायता व्यवस्था को आगे बढ़ाया है।
निर्यात गतिविधियों को बनाए रखने पर जोर
वाणिज्य विभाग के अनुसार, ताजा विस्तार का उद्देश्य भारतीय निर्यात क्षेत्र में लचीलापन बनाए रखना, व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखना और मौजूदा भू-राजनीतिक तथा लॉजिस्टिक्स संबंधी अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों को सहायता उपलब्ध कराना है।
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