शरद पूर्णिमा पर प्रयागराज संगम में गंगा स्नान, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
प्रयागराज में शरद पूर्णिमा के अवसर पर त्रिवेणी संगम में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने गंगा स्नान कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की। इस दिन खीर को चांदनी में रखने और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
तीर्थराज प्रयागराज में शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का विशेष नजारा देखने को मिल रहा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और स्नान के बाद मां गंगा तथा माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और जनकल्याण की प्रार्थना की।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में शरद पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान लाभकारी होती हैं। इसी वजह से इस पर्व को आरोग्य, सुख और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
चांदनी में खीर रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा पर रात के समय खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें खीर को अमृतमयी बना देती हैं। अगले दिन सुबह भगवान को भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है और परिवार तथा अन्य लोगों में बांटा जाता है।
संगम पर स्नान करने पहुंचीं महिला श्रद्धालु संजू ने बताया कि वह परिवार और सभी लोगों के कल्याण की कामना से गंगा स्नान करने आई हैं। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है और इस अवसर पर खीर बनाकर रातभर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है।
मां लक्ष्मी और इंद्र देव की पूजा का विधान
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर गंगा स्नान के साथ शाम को खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है। सुबह भगवान को भोग लगाने के बाद श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और दूसरों में वितरित करते हैं।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी और इंद्र देव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने धार्मिक माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।
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