विजयनगर में सूखे का जायजा लेगी केंद्रीय टीम, 2.71 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित
कर्नाटक के विजयनगर जिले में बारिश की भारी कमी से पैदा हुई सूखे की स्थिति और फसल नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम दौरा करेगी। टीम प्रभावित गांवों में किसानों से बातचीत कर फसल, पेयजल और अन्य समस्याओं की जानकारी लेगी।
कर्नाटक के विजयनगर जिले में सूखे की स्थिति और बारिश की कमी से फसलों को हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम क्षेत्र का दौरा करेगी। टीम उन इलाकों का निरीक्षण करेगी, जहां कम बारिश के कारण कृषि गतिविधियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
केंद्रीय टीम के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों को जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टर कविता मन्नीकेरी ने अधिकारियों से कहा है कि टीम के सामने जिले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से रखी जाए। किसानों की समस्याओं और फसल नुकसान से जुड़ी किसी भी जानकारी को छिपाने के बजाय जमीनी स्थिति के आधार पर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इन गांवों का करेगी निरीक्षण
केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम के प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत हरपनहल्ली तालुक के दुग्गावती और नीलगुंडा गांवों का दौरा किया जाएगा। यहां वीबी जी राम जी योजना के तहत चल रहे झील जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण प्रस्तावित है।
इसके बाद टीम मैदुर गांव में विभिन्न फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेगी। इनमें मक्का, बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी और प्याज जैसी फसलें शामिल हैं। टीम किसानों से सीधे बातचीत कर पेयजल संकट और सूखे के चलते सामने आ रही अन्य परेशानियों की जानकारी भी जुटाएगी।
हडगली तालुक में भी होगा निरीक्षण
टीम हडगली तालुक के इटागी गांव भी जाएगी। यहां मक्का और प्याज की फसलों पर पड़े सूखे के असर का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा झील जीर्णोद्धार कार्य और मजदूरों की स्थिति की भी जानकारी ली जाएगी।
दौरे के बाद कुडलगी स्थित टूरिस्ट मंदिर में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में अधिकारियों से जिले में सूखे की स्थिति, फसल नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों के बारे में विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
57 प्रतिशत बारिश की कमी
विजयनगर में इस वर्ष मानसून के दौरान बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गई है। जून से सितंबर के बीच जिले में सामान्य बारिश करीब 38.91 सेंटीमीटर रहने की उम्मीद थी, लेकिन इस अवधि में केवल 16.84 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई। इसके चलते बारिश में लगभग 57 प्रतिशत की कमी रही।
कम बारिश का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 2.71 लाख हेक्टेयर कृषि फसलें प्रभावित हुई हैं।
केंद्रीय टीम अपने दौरे के दौरान किसानों से सीधे संवाद कर सूखे की वास्तविक स्थिति समझेगी। टीम फसल नुकसान के साथ-साथ पेयजल संकट और सूखे से जुड़े अन्य प्रभावों का भी जमीनी स्तर पर आकलन करेगी।
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