वन संरक्षण में टेक्नोलॉजी का बढ़े इस्तेमाल, भूपेंद्र यादव ने डेटा और निगरानी मजबूत करने पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जंगलों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने बेहतर डेटा, स्वदेशी तकनीक, वनकर्मियों की क्षमता निर्माण और कार्बन सिंक लक्ष्य हासिल करने में तकनीकी नवाचार को अहम बताया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जंगल और पेड़ों से जुड़े संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर करने और नीतिगत फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी है।
प्रकृति के साथ संतुलन जरूरी
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि इंसान प्रकृति से ऊपर नहीं है। उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके साथ संतुलन बनाकर विकास की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
मंत्री ने प्रकृति आधारित समाधानों के जरिए भारत की जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को गति देने के लिए तकनीकी नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।
स्वदेशी तकनीक और वनकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
भूपेंद्र यादव ने देश में स्वदेशी तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों को नई तकनीकों और आधुनिक आकलन प्रणालियों के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है जब संस्थागत क्षमता और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की विशेषज्ञता भी मजबूत हो।
इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के लिए बेहतर डेटा
केंद्रीय मंत्री ने ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (ISFR) तैयार करने के लिए डेटा की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत बताई। उन्होंने फील्ड स्तर के अनुभवों को बेहतर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में शामिल करने का सुझाव दिया।
उनके मुताबिक, मजबूत और विश्वसनीय डेटा के आधार पर तैयार रिपोर्ट जंगलों के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज बन सकती है।
कार्बन सिंक लक्ष्य में तकनीक की अहम भूमिका
भूपेंद्र यादव ने भारत के बढ़े हुए कार्बन सिंक लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि 2035 तक 3.5 से 4 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड-समकक्ष कार्बन सिंक बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी नवाचार भी महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए मजबूत संस्थागत क्षमता, प्रभावी नीतियां और स्थानीय लोगों व समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
जंगलों के आकलन पर तकनीकी सत्र
कार्यशाला में जंगलों की सीमाओं के डिजिटलीकरण, वन एवं वृक्ष आवरण के आकलन और कार्बन स्टॉक के अनुमान जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसमें राज्य वन विभागों के अधिकारियों के साथ वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य वन एवं वृक्ष संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए तकनीक आधारित बेहतर तरीकों की पहचान करना था।
वन संरक्षण में साझा मानकों की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने अलग-अलग संस्थानों के बीच मानकों के एकीकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे वन संरक्षण के लिए समन्वित तरीके से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने क्षतिपूरक वनीकरण को केवल पेड़ लगाने तक सीमित रखने के बजाय वृक्षारोपण के संरक्षण और हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
जंगल की आग के हॉटस्पॉट की पहचान पर जोर
भूपेंद्र यादव ने जंगलों में आग की घटनाओं के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और हॉटस्पॉट निर्धारित करने की जरूरत बताई। इससे इन क्षेत्रों में आग की रोकथाम के लिए लक्षित रणनीति तैयार करने और समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने आर्द्रभूमि, जंगल और घास के मैदानों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि आर्द्रभूमियां जैव-विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं।
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