भारत-रूस व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से बढ़ाया सहयोग
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने फार्मा, ऑटो, खाद्य और गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने तथा रूसी कंपनियों को भारत में निवेश और विनिर्माण के लिए आमंत्रित किया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और रूस के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को नई गति देने का आह्वान किया है। नई दिल्ली में आयोजित ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के दौरान रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ पूर्ण बैठक में गोयल ने दोनों देशों के उद्योग जगत से व्यापार और निवेश के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर सकते हैं।
60 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर तक व्यापार बढ़ाने की चुनौती
पीयूष गोयल के मुताबिक भारत-रूस का मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर है। इसे अगले चार वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए लगभग 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए लगातार दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि जरूरी होगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं होगा। इसके लिए दोनों देशों की कंपनियों और उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
फार्मा, ऑटो और खाद्य क्षेत्र में अवसर
गोयल ने भारत-रूस व्यापार को अधिक विविध बनाने पर जोर दिया। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर, खाद्य और अन्य इंजीनियरिंग उत्पादों में भारतीय निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं बताईं।
उन्होंने कहा कि रूस कई ऐसे उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिन्हें भारत भी पर्याप्त मात्रा में निर्यात करता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।
खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ा
गोयल ने बताया कि रूस को भारतीय मांस एवं मांस उत्पादों का निर्यात 36 मिलियन डॉलर से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर हो गया है। मछली और जलीय उत्पादों का निर्यात 123 मिलियन डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर तथा खाद्य सब्जियों का निर्यात 38 मिलियन डॉलर से बढ़कर 54 मिलियन डॉलर पहुंच गया।
कॉफी, चाय और मसालों के निर्यात में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 116 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वहीं मिलिंग उद्योग से जुड़े उत्पादों का निर्यात करीब दोगुना हुआ है।
गैर-ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की जरूरत
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच गैर-ऊर्जा क्षेत्र का व्यापार अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, कपड़ा, खाद्य, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारतीय निर्यात बढ़ाने को अहम बताया।
गोयल के मुताबिक इससे द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन लाने और नए बाजार विकसित करने में मदद मिलेगी।
50 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य पर जोर
निवेश के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र के तहत उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, खनन, रेलवे और उभरती तकनीकों से जुड़ी करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
उन्होंने रूस से भारत में फार्मा, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेवाओं, इंजीनियरिंग और रेलवे जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर तलाशने का आग्रह किया।
निवेश संधि और FTA वार्ता में प्रगति
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और रूस नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को बेहतर कानूनी भरोसा उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इससे खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए बाजारों तक पहुंच के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
स्थानीय मुद्राओं में भुगतान पर जोर
दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। गोयल ने कहा कि कई बार व्यापार को टैरिफ से ज्यादा भुगतान और लेनदेन से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें प्रभावित करती हैं।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने की जरूरत भी बताई।
रूसी कंपनियों को भारत में उत्पादन का न्योता
गोयल ने रूसी कंपनियों से भारत को केवल अपने उत्पाद बेचने का बाजार न मानकर यहां विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत के औद्योगिक गलियारे निवेश के लिए तैयार हैं और वैश्विक कंपनियों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने भारत के युवा और कुशल श्रमबल को रूसी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।
दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं का मेल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की युवा प्रतिभा, कौशल और तेजी से बढ़ता औद्योगिक आधार तथा रूस का एयरोस्पेस, धातुकर्म, परमाणु तकनीक और खनन का लंबा अनुभव एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित रखने के बजाय व्यापक औद्योगिक साझेदारी में बदल सकता है।
‘भरोसा’ है संबंधों की बड़ी ताकत
भारत-रूस संबंधों का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों ने कई दशकों में वैश्विक परिस्थितियों में हुए बदलाव देखे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत आपसी भरोसा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यही भरोसा दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पहली बार भारत में इनोप्रोम का आयोजन
पीयूष गोयल ने भारत में पहली बार ‘इनोप्रोम’ के आयोजन को दोनों देशों के औद्योगिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी लंबे समय से रूसी इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमताओं को वैश्विक मंच देने का काम कर रही है।
भारत में इसके आयोजन को उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को विचार और प्रोटोकॉल से आगे बढ़ाकर वास्तविक उत्पादन, निवेश और औद्योगिक साझेदारी की दिशा में ले जाने वाला कदम बताया।
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