भारत-EU FTA पर आगे बढ़ी प्रक्रिया, पीयूष गोयल ने मारोस सेफकोविच से की मुलाकात
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से इतर यूरोपीय आयोग के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और उसके लागू होने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की।
मिलवॉकी: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को यूरोपीय आयोग के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच से मुलाकात की। यह बैठक अमेरिका के मिलवॉकी में आयोजित G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से इतर हुई। भारत सरकार के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भारत-EU FTA की प्रक्रिया पर हुई समीक्षा
बैठक में दोनों पक्षों ने FTA पर हस्ताक्षर और उसके लागू होने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा भारत-EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC), विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार तथा G20 के तहत साझा व्यापार प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच X पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चर्चा में भारत-EU FTA की अगली प्रक्रिया पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया।
27 जनवरी को पूरी हुई थी FTA वार्ता
भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी की थी। यूरोपीय आयोग के अनुसार, भारत और EU ने 2007 में FTA वार्ता शुरू की थी। बातचीत 2013 में रुक गई थी और जून 2022 में इसे दोबारा शुरू किया गया।
समझौते की बातचीत पूरी होने के बाद भी इसके लागू होने के लिए आगे की कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाएं जरूरी हैं। यूरोपीय आयोग के अनुसार, समझौते के अंतिम रूप से लागू होने से पहले हस्ताक्षर, EU की आंतरिक प्रक्रियाएं और भारत की आवश्यक अनुमोदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सितंबर में EU परिषद के सामने रखा गया प्रस्ताव
यूरोपीय आयोग ने 11 सितंबर 2026 को भारत-EU FTA पर हस्ताक्षर और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक अनुमति हासिल करने के उद्देश्य से प्रस्ताव EU परिषद के सामने रखा था। इससे समझौते को अगले संस्थागत चरण में ले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर जोर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी भारत-EU FTA को व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों से जोड़ते हुए इसके महत्व पर बात की है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते का उद्देश्य दोनों बाजारों के बीच व्यापारिक पहुंच को बढ़ाना और आर्थिक सहयोग के लिए नए अवसर तैयार करना है।
यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत और EU के बीच वस्तुओं का व्यापार करीब 118 अरब यूरो रहा। EU भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
तकनीक, विनिर्माण और AI पर भी फोकस
भारत की व्यापार नीति में FTA के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण, तकनीकी क्षमता और निवेश को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस संदर्भ में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
MSME क्षेत्र के लिए भी नई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को उत्पादकता बढ़ाने तथा लागत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने के संभावित माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-EU FTA के आगे बढ़ने के साथ अब दोनों पक्षों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर और इसे लागू करने से जुड़ी अगली प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
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