यूरोप की स्पेस ताकत बढ़ाने की कोशिश, मैक्रों की मेजबानी में पेरिस में इंटरनेशनल स्पेस समिट
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में पेरिस में 9-10 सितंबर को इंटरनेशनल स्पेस समिट आयोजित हो रहा है। करीब 120 देशों के प्रतिनिधि अंतरिक्ष सहयोग, नियमन, सुरक्षा और यूरोप की रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर चर्चा करेंगे।
पेरिस: यूरोप को अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर और प्रभावशाली बनाने की कोशिशों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पेरिस में इंटरनेशनल स्पेस समिट की मेजबानी कर रहे हैं। 9 और 10 सितंबर को आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में करीब 120 देशों के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
हालांकि, अमेरिका की प्रमुख स्पेस कंपनियों के सम्मेलन से दूरी बनाने और कुछ प्रमुख यूरोपीय नेताओं के शामिल नहीं होने से समिट को लेकर शुरुआती चर्चा कुछ कमजोर हुई है।
SpaceX और Blue Origin समेत अमेरिकी कंपनियां दूर
सम्मेलन से पहले चार प्रमुख अमेरिकी स्पेस कंपनियों ने इसमें शामिल होने से पीछे हटने का फैसला किया। इनमें एलन मस्क की SpaceX और जेफ बेजोस की Blue Origin भी शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन को सम्मेलन के एजेंडे में यूरोप के हितों को अधिक प्राथमिकता दिए जाने की आशंका थी। अमेरिकी कंपनियों के हटने के बाद सम्मेलन में प्रस्तावित कुछ घोषणाओं को भी रद्द करना पड़ा।
जर्मनी और इटली के नेता भी नहीं होंगे शामिल
जर्मनी इस सम्मेलन का आधिकारिक सह-अध्यक्ष है, लेकिन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की भी समिट में भाग लेने की उम्मीद नहीं है।
फ्रांस लंबे समय से यूरोप की अंतरिक्ष क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने की वकालत करता रहा है। दूसरी ओर, जर्मनी अमेरिकी कंपनियों, खासकर SpaceX, के साथ सहयोग को लेकर अपेक्षाकृत अधिक व्यावहारिक रुख रखता है।
यूरोप के सैटेलाइट नेटवर्क को लेकर भी दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। मैक्रों यूरोपीय संघ के सुरक्षित IRIS² सैटेलाइट नेटवर्क के समर्थन में हैं, जबकि जर्मनी अपने अलग सुरक्षित नेटवर्क की योजना पर काम कर रहा है।
अंतरिक्ष यातायात और रेडियो फ्रीक्वेंसी पर चर्चा
आयोजकों ने सम्मेलन में अपेक्षाकृत कम राजनीतिक भागीदारी की चिंताओं को ज्यादा महत्व नहीं दिया है। उनके मुताबिक, पेरिस के ऐतिहासिक Grand Palais में करीब 2,000 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और अमेरिकी कंपनियों की भी कुछ भागीदारी बनी रहेगी।
यह सम्मेलन किसी औपचारिक राजनीतिक निर्णय के लिए आयोजित नहीं किया गया है। हालांकि, फ्रांस अंतरिक्ष यातायात के प्रबंधन, अंतरिक्ष तक पहुंच और सीमित रेडियो फ्रीक्वेंसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहमति और घोषणाएं हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गुरुवार को सम्मेलन में नीतिगत भाषण देंगी। चीन के प्रतिनिधियों के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा कई कारोबारी घोषणाएं और कॉमर्शियल डील सामने आने की संभावना है।
अमेरिका से अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की चुनौती
फ्रांस लंबे समय से यूरोप की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल रहा है। हालांकि, अब जर्मनी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) में सबसे बड़ा योगदान देने वाला देश बन चुका है।
ESA के महानिदेशक जोसेफ अशबाखर के अनुसार, यूरोप अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका की तुलना में लगभग पांच गुना कम निवेश करता है। ऐसे में अमेरिकी तकनीक और लॉन्च सेवाओं पर निर्भरता कम करना यूरोप के लिए बड़ी चुनौती है।
ESA ऐसे प्रस्तावों पर भी काम कर रही है, जिनका उद्देश्य यूरोपीय अंतरिक्ष अभियानों और सैटेलाइट लॉन्च के लिए अमेरिकी रॉकेटों पर निर्भरता घटाना है। पेरिस समिट में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
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