गिद्ध संरक्षण को लेकर पंचकूला में राष्ट्रीय कार्यशाला, भूपेंद्र यादव ने सुरक्षित पशु चिकित्सा पर दिया जोर

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 पर हरियाणा के पंचकूला में गिद्ध संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गिद्धों के संरक्षण के लिए सुरक्षित पशु चिकित्सा, सुरक्षित भोजन और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया। पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र में 2025-26 के दौरान 35 चूजों का प्रजनन हुआ और 87 गिद्धों को जंगल में छोड़ा गया। कार्यक्रम में गिद्धों की घटती आबादी को रोकने और उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास के लिए सरकार, विशेषज्ञों और समाज की संयुक्त भूमिका पर चर्चा हुई।

Sep 06, 2026 - 17:20
0 0
गिद्ध संरक्षण को लेकर पंचकूला में राष्ट्रीय कार्यशाला, भूपेंद्र यादव ने सुरक्षित पशु चिकित्सा पर दिया जोर

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर रविवार को हरियाणा के पंचकूला में गिद्ध संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से सुधार की ओर- भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम में हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव राज्य मंत्री राव नरबीर सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और संरक्षण विशेषज्ञ शामिल हुए।

गिद्धों को बताया प्रकृति का सफाईकर्मी

भूपेंद्र यादव ने कहा कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण पक्षी हैं। वे मृत पशुओं के शवों को तेजी से खाकर जैविक पदार्थों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में गिद्धों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के गिद्ध, हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं।

1990 के दशक से गिद्धों की संख्या में गिरावट

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में 1990 के दशक से गिद्धों की आबादी में गंभीर गिरावट देखी गई। इसके पीछे खाद्य श्रृंखला में बदलाव और पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दर्द निवारक दवाओं को प्रमुख कारणों में माना गया।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानव-पशु संघर्ष जैसी चुनौतियों के बीच गिद्धों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए सरकार, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, पशुपालकों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा।

गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्र बनाने पर जोर

भूपेंद्र यादव ने गिद्धों के लिए सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने, पशु चिकित्सा व्यवस्था को गिद्ध-सुरक्षित बनाने और तकनीकी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पशु चिकित्सकों और पशुपालकों से मृत पशुओं के सुरक्षित प्रबंधन को बढ़ावा देने की अपील की।

पिंजौर के जटायु केंद्र का किया दौरा

कार्यशाला से पहले केंद्रीय मंत्री ने पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (JCBC) का दौरा किया। उन्होंने केंद्र की सुविधाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों से गिद्ध संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी ली।

यह केंद्र हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की संयुक्त पहल है। यहां सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले और पतली चोंच वाले गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन पर काम किया जाता है।

2025-26 में 35 चूजों का प्रजनन

केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार 2025-26 में यहां 356 गिद्ध मौजूद थे और 35 चूजों का प्रजनन हुआ। इसी अवधि में 87 गिद्धों को जंगल में छोड़ा गया, जबकि 90 पक्षियों को दूसरे संस्थानों में भेजा गया।

इसके अलावा गिद्ध संरक्षण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए 22 संस्थानों के 1,222 लोगों को प्रशिक्षित किया गया।

संरक्षण की सफलता का पैमाना बदला जाए

हरियाणा के मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि संरक्षण की सफलता का आकलन केवल प्रजनन के आंकड़ों से नहीं होना चाहिए। स्वस्थ आबादी का विकास, वैज्ञानिक जानकारी और गिद्धों की प्राकृतिक आवासों में वापसी भी संरक्षण की सफलता के महत्वपूर्ण मानक हैं।

कॉफी टेबल बुक का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान ‘स्टोरी ऑफ जटायु : सेविंग इंडियाज वल्चर’ नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही गिद्ध संरक्षण पर आयोजित ड्राइंग और फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि गिद्धों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी जरूरी है। सुरक्षित पशु चिकित्सा, बेहतर शव प्रबंधन और संरक्षण केंद्रों की क्षमता बढ़ाकर इन महत्वपूर्ण पक्षियों की आबादी को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User