शिक्षक दिवस पर PM मोदी का शिक्षकों से संवाद, बोले- किताबों से आगे बढ़कर बच्चों की जिंदगी समझना जरूरी
शिक्षक दिवस पर पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को किताबों और सिलेबस से आगे बढ़कर बच्चों की जिंदगी और उनकी प्रतिभा को समझना चाहिए। स्क्रीन टाइम, खेलकूद और नशे से बचाव जैसे मुद्दों पर भी पीएम मोदी ने शिक्षकों की भूमिका को अहम बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के मौके पर देश के शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह दिन समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश भी साझा किए।
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की भूमिका तक सीमित नहीं हैं। उनकी जिम्मेदारी बच्चों की प्रतिभा पहचानने, उन्हें सही दिशा देने और उनके व्यक्तित्व को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षिका से इंटरव्यू को लेकर हुई दिलचस्प बातचीत
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान एक शिक्षिका ने बताया कि वह बच्चों को नए तरीके से इंटरव्यू करना सिखाती हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बच्चे घर जाकर अपने माता-पिता का भी इंटरव्यू लेने लगे हैं।
शिक्षिका ने बताया कि उनके स्कूल के बच्चे रिपोर्टर बनने में काफी रुचि दिखाते हैं। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने बच्चों की जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति को सकारात्मक बताया।
पब्लिक स्पीकिंग पर पीएम मोदी ने मांगी टिप्स
एक अन्य शिक्षिका ने बताया कि वह केमिस्ट्री के साथ पर्यावरण शिक्षा भी पढ़ाती हैं और बच्चों को सार्वजनिक मंच पर बोलने के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने खुद को विद्यार्थी मानकर शिक्षिका से पूछा कि बेहतर वक्ता बनने के लिए क्या करना चाहिए। शिक्षिका ने आत्मविश्वास को जरूरी बताया। इसके बाद दोनों के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हुई और पीएम मोदी की ‘आभा’ को लेकर भी मजेदार संवाद हुआ।
हर बच्चे की अलग प्रतिभा पहचानने पर जोर
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से पूछा कि अगर कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करता, तो क्या उसकी किसी अन्य प्रतिभा को पहचानने की कोशिश की जाती है।
एक शिक्षिका ने जवाब दिया कि हर बच्चे में अलग क्षमता, प्रतिभा और चुनौतियां होती हैं। शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह इन विशेषताओं को पहचानकर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर दे।
आदिवासी छात्रों की शिक्षा पर भी हुई चर्चा
एक शिक्षक ने बताया कि एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से ऐसे परिवारों तक शिक्षा पहुंच रही है, जहां बच्चों की पीढ़ियों में पहली बार स्कूल और उच्च शिक्षा का सपना आकार ले रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे विद्यार्थी अब IIT, NIT और मेडिकल शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखते हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता पर भी हुई बातचीत
एक शिक्षिका ने अपने शोध और सामाजिक जागरूकता के काम के बारे में बताते हुए कहा कि वह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जुड़े विषयों पर काम कर रही हैं।
इस पर प्रधानमंत्री ने काशी में चलाए जा रहे ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ने से महिलाएं स्वास्थ्य जांच के लिए आगे आ रही हैं।
बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता
प्रधानमंत्री ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और मैदान से जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि खेल और क्रिएटिव गतिविधियां बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल की आदत से बाहर निकालने में मदद कर सकती हैं।
ड्रग्स से बचाव में शिक्षकों की भूमिका अहम
पीएम मोदी ने बच्चों में नशीली चीजों के इस्तेमाल की रोकथाम के लिए शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा को सिर्फ किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक जिंदगी, उनकी परेशानियों और उनकी जरूरतों को भी समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के बचपन और उनके समग्र विकास की रक्षा करने में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
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