बालाघाट के जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य अभियान तेज, 32 हजार से ज्यादा लोगों की हुई जांच

बालाघाट के जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकार का अभियान तेज है। अब तक 32,433 लोगों की जांच और 14,637 बच्चों को MR वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जा चुकी है। पिछले सात दिनों में खसरे का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

Sep 05, 2026 - 17:02
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बालाघाट के जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य अभियान तेज, 32 हजार से ज्यादा लोगों की हुई जांच

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर ब्लॉक के जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में बीमारी की निगरानी, जांच, उपचार, टीकाकरण और दूरदराज की बस्तियों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

स्थिति की निगरानी के लिए केंद्र, मध्य प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। घर-घर जाकर मरीजों की पहचान, बुखार की जांच, नमूने लेने, उपचार और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

12 अगस्त को पहुंची राष्ट्रीय टीम

बहु-विषयक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम को बालाघाट भेजा गया। इसमें जनस्वास्थ्य निगरानी, टीकाकरण, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण और आईसीएमआर से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी का दायरा बढ़ाने और दुर्गम गांवों के लिए अलग माइक्रो-प्लान तैयार करने की सलाह दी है।

आईसीएमआर की टीमें कर रही जांच

आईसीएमआर की टीमें भी मामले की वैज्ञानिक जांच में सहयोग कर रही हैं। चिकित्सीय मूल्यांकन, प्रयोगशाला परीक्षण, खसरा-मलेरिया निगरानी, मौतों की समीक्षा और कीट विज्ञान संबंधी अध्ययन के जरिए स्थिति का आकलन किया जा रहा है।

छह मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात

दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बिरसा और बैहर ब्लॉक में छह मोबाइल मेडिकल यूनिट लगाई गई हैं। ये टीमें बुखार की जांच, ओपीडी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीबी और अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग के साथ दवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।

स्वास्थ्य निगरानी का दायरा शुरुआती तीन गांवों से बढ़ाकर करीब 50 गांवों तक किया गया है। 10 से अधिक डॉक्टर और 10 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लगातार अभियान में जुटे हैं।

32,433 लोगों की जांच

अभियान के तहत अब तक 32,433 लोगों की चिकित्सीय जांच की जा चुकी है। उपचार की जरूरत वाले बच्चों में से 431 को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें 379 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। फिलहाल 52 बच्चों का उपचार और निगरानी जारी है।

14,637 बच्चों को MR वैक्सीन

प्रकोप-प्रतिक्रिया के तहत 1 से 10 वर्ष की आयु के 14,637 बच्चों को खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी गई है।

इसके अलावा 600 से ज्यादा पेयजल स्रोतों को साफ किया गया और 4,338 घरों में कीटनाशक का छिड़काव पूरा किया गया। प्रभावित इलाकों में फॉगिंग भी कराई गई है।

कुपोषण और अन्य बीमारियों की भी पहचान

स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्चों की अन्य समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया। करीब 7,711 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण से प्रभावित पाए गए, जिनमें 518 को पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती किया गया।

वहीं 13,406 बच्चों में दस्त और 274 बच्चों में गंभीर निमोनिया की पहचान हुई, जिनका उपचार किया गया। राज्य के दस्तक 2026 अभियान के तहत करीब 1.58 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग भी की जा चुकी है।

सात दिनों से खसरे का नया मामला नहीं

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, लगातार निगरानी, टीकाकरण, समय पर उपचार, रेफरल, पोषण संबंधी हस्तक्षेप और वेक्टर नियंत्रण जैसे कदमों के बाद पिछले सात दिनों में बालाघाट में खसरे का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

मौतों की वैज्ञानिक समीक्षा

सरकार ने दर्ज मौतों की मामलेवार समीक्षा की है। उपलब्ध रिकॉर्ड और वर्बल ऑटोप्सी के आधार पर कई अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियां सामने आई हैं, जिनमें खसरा, मलेरिया, दोनों का सह-संक्रमण, श्वसन संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के बिना सभी मौतों को किसी एक बीमारी या रोगजनक से जोड़ना उचित नहीं होगा। केंद्र और राज्य की टीमें संवेदनशील जनजातीय और PVTG आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने तथा स्थिति पर लगातार निगरानी रखने में जुटी हैं।

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