ईरान संघर्ष ट्रंप के कार्यकाल से आगे भी खिंच सकता है, पूर्व अमेरिकी अधिकारी की चेतावनी
पूर्व अमेरिकी अधिकारी ब्रेट मैकगर्क ने कहा है कि ईरान के साथ मौजूदा टकराव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक जारी रह सकता है और अगली सरकार को भी इससे निपटना पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दोनों तरह का दबाव बनाए रखने की बात कही है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को लेकर पूर्व अमेरिकी अधिकारी ब्रेट मैकगर्क ने लंबा चलने की आशंका जताई है। मैकगर्क के मुताबिक, मौजूदा टकराव का कोई व्यापक और स्थायी समाधान फिलहाल स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है और यह संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंतिम दौर तक जारी रह सकता है।
मैकगर्क ने CNN के फरीद जकारिया के कार्यक्रम में कहा कि ईरान का मुद्दा अगले अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी बड़ी चुनौती बना रह सकता है। उन्होंने संभावित स्थिति बताते हुए लंबे समय तक आर्थिक दबाव, समय-समय पर सैन्य कार्रवाई और बीच में अस्थायी युद्धविराम या समझौतों की संभावना का उल्लेख किया।
ईरान के साथ व्यापक समझौता मुश्किल
मैकगर्क के मुताबिक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी बड़े समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। उनका आकलन है कि तेहरान के नीति-निर्माता परमाणु क्षमता को अपनी सुरक्षा से जोड़कर देख सकते हैं, जिससे बातचीत के जरिए किसी व्यापक समझौते की राह और कठिन हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष के पीछे रखे गए उद्देश्यों में ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की संभावना को खुला रखने से संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता और जटिल हो सकता है।
मैकगर्क ने मौजूदा स्थिति को लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी-ईरान चुनौती का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, आने वाले समय में आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव के साथ-साथ सीमित सैन्य कार्रवाइयों तथा अस्थायी सीजफायर जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन ने कूटनीति और सैन्य विकल्प दोनों खुले रखे
इस बीच ट्रंप प्रशासन की ओर से भी संकेत दिया गया है कि ईरान के मामले में अमेरिका कूटनीतिक बातचीत के साथ सैन्य विकल्प को भी खुला रख रहा है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने CBS के कार्यक्रम Face the Nation में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन आर्थिक स्तर पर दबाव बनाने के साथ सैन्य विकल्प के लिए भी तैयार है।
राइट ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की संभावित सैन्य योजनाओं के बारे में वह पहले से कोई जानकारी साझा नहीं करेंगे। उनके अनुसार, ट्रंप अलग-अलग संभावित परिस्थितियों के लिए तैयारी करते हैं और साथ ही बातचीत का रास्ता भी खुला रखते हैं। उन्होंने माना कि प्रशासन एक साथ कूटनीतिक और सैन्य दबाव, दोनों विकल्पों पर काम कर रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी असर
ईरान संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। राइट ने माना कि खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति में आगे भी व्यवधान की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।
हालांकि, उन्होंने आने वाले समय में अमेरिकी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में सुधार, अमेरिका में ईंधन उत्पादन और मौसमी मांग में बदलाव से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालिया बाजार आंकड़ों के मुताबिक, मध्य पूर्व से कच्चे तेल का प्रवाह बढ़ने के कारण तेल की कीमतों पर तत्काल आपूर्ति संबंधी दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि, परिवहन, बीमा और रिफाइनिंग से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
ट्रंप के फैसले पर राजनीतिक दबाव
ईरान संघर्ष का असर अमेरिका के घरेलू राजनीतिक माहौल पर भी पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ऊर्जा कीमतें और ईरान नीति प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
राइट ने कहा कि ट्रंप को ईरान के खिलाफ कार्रवाई से पहले ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जानकारी थी। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने परमाणु हथियारों से लैस ईरान की संभावना को रोकने को प्राथमिकता दी, भले ही इससे अल्पावधि में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहा हो।
मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा चिंताएं, सैन्य विकल्प, कूटनीतिक बातचीत और ऊर्जा बाजार में स्थिरता। मैकगर्क की टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि इन चुनौतियों का समाधान जल्द होने के बजाय लंबे समय तक अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा बना रह सकता है।
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