Jaishankar PIF News: PIF में भारत को मिला रणनीतिक साझेदार का दर्जा, जयशंकर ने बताया सकारात्मक कदम
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत को पैसिफिक आइलैंड्स फोरम (PIF) में रणनीतिक साझेदार श्रेणी में शामिल किया गया है। न्यूयॉर्क में FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक में स्वास्थ्य, सौर ऊर्जा, क्षमता निर्माण, समुद्री संपर्क और सतत विकास सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत को पैसिफिक आइलैंड्स फोरम (PIF) में ‘रणनीतिक साझेदार’ का दर्जा दिया गया है। उन्होंने इसे सकारात्मक घटनाक्रम बताते हुए कहा कि इससे भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में जयशंकर ने भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच यानी FIPIC की विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की।
PIF में भारत की नई भूमिका
बैठक के दौरान जयशंकर ने बताया कि उन्हें PIF महासचिव बैरन वाका का पत्र मिला है, जिसमें भारत को फोरम में रणनीतिक साझेदार श्रेणी में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के लिए सकारात्मक है और इससे सहयोग के मौजूदा ढांचे को और मजबूत किया जा सकता है।
भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच FIPIC के माध्यम से विकास, स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, क्षमता निर्माण और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत लंबे समय से Pacific Islands Forum के साथ संवाद और विकास साझेदारी में शामिल रहा है।
विकास परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा
जयशंकर ने 2023 में हुए तीसरे FIPIC शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति की जानकारी साझा की। उन्होंने विकास साझेदारी और भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत शुरू की गई परियोजनाओं का उल्लेख किया।
उनके अनुसार इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय आजीविका को मजबूत करना, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देना है। 2023 के FIPIC शिखर सम्मेलन में भी भारत ने डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में प्रशांत देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया था।
फिजी में अस्पताल और समुद्री एंबुलेंस पर काम
विदेश मंत्री ने फिजी में 100 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। इसके अलावा भारत को प्रशांत क्षेत्र के 12 देशों से 20 समुद्री एंबुलेंस की मांग मिलने की जानकारी दी गई।
जयशंकर ने कहा कि भारत मार्च 2027 तक इन एंबुलेंस की आपूर्ति करने की स्थिति में आने की उम्मीद कर रहा है। फिजी में कृत्रिम अंग लगाने के लिए शिविर आयोजित करने की योजना का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सौर ऊर्जा और महिला इंजीनियरों पर जोर
भारत ने प्रशांत द्वीप देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी कई परियोजनाएं शुरू की हैं। जयशंकर के अनुसार 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में हजारों घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का काम पूरा किया गया है और महिला सौर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।
2014 के FIPIC सहयोग में भी भारत ने प्रशांत देशों में सौर विद्युतीकरण और महिला सौर इंजीनियरों के प्रशिक्षण को प्रमुख पहल के रूप में रखा था।
2050 ब्लू पैसिफिक रणनीति का समर्थन
जयशंकर ने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र के देशों की ‘2050 Strategy for the Blue Pacific Continent’ का सम्मान और समर्थन करता है। यह रणनीति प्रशांत क्षेत्र के देशों और समुदायों के दीर्घकालिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत का प्रशांत क्षेत्र के प्रति दृष्टिकोण मांग-आधारित, विकास-केंद्रित और जन-केंद्रित रहा है। स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, तकनीक और क्षमता निर्माण में सहयोग को आगे बढ़ाने की बात भी उन्होंने रखी।
अल नीनो और जलवायु चुनौतियों पर सहयोग
बैठक में प्रशांत द्वीप देशों के सामने मौजूद जलवायु और प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत अल नीनो जैसी घटनाओं के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में सहयोग के लिए तैयार है।
इसके अलावा अंतरिक्ष तकनीक, टिकाऊ तटीय एवं महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी उन्होंने बात की। भारत ने प्रशांत देशों को International Solar Alliance और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure जैसी पहलों से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
भारत की प्रशांत क्षेत्र में विकास साझेदारी में स्वास्थ्य, सौर ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पहले से प्रमुख क्षेत्र रहे हैं।
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