पीएम मोदी ने साझा किया यजुर्वेद का शांति मंत्र, प्रकृति और मानव कल्याण का दिया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुक्ल यजुर्वेद का एक प्राचीन शांति मंत्र साझा किया। इस मंत्र में वायु, सूर्य और वर्षा से मानव जीवन के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की गई है। पीएम मोदी की पोस्ट में वैदिक ज्ञान और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया गया है।

Sep 07, 2026 - 09:48
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पीएम मोदी ने साझा किया यजुर्वेद का शांति मंत्र, प्रकृति और मानव कल्याण का दिया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शुक्ल यजुर्वेद का एक प्राचीन सुभाषित साझा किया। यह मंत्र प्रकृति के प्रमुख तत्वों—वायु, सूर्य और वर्षा—से मानव जीवन के लिए सुख, शांति और कल्याण की कामना करता है।

पीएम मोदी ने शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता के 36वें अध्याय के 10वें मंत्र को साझा करते हुए लिखा—“शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः। शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥”

इस मंत्र का भावार्थ है कि वायु हमारे लिए शुद्ध और सुखद हो, सूर्य की किरणें कल्याणकारी हों तथा वर्षा समय पर और लाभकारी रूप से हो। वैदिक परंपरा में इस मंत्र को प्रकृति, मानव और ब्रह्मांड के बीच संतुलन तथा शांति की भावना से जोड़ा जाता है।

यजुर्वेद में प्रकृति और मानव जीवन के आपसी संबंध को विशेष महत्व दिया गया है। हवा, सूर्य और जल मानव जीवन के साथ-साथ कृषि के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। स्वच्छ वायु स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, सूर्य ऊर्जा और पौधों के विकास में अहम भूमिका निभाता है, जबकि वर्षा खेती और खाद्य उत्पादन के लिए आवश्यक है।

मंत्र का संदेश आज के समय में भी प्रासंगिक माना जा सकता है, जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अनियमित बारिश और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री द्वारा इस वैदिक मंत्र को साझा किए जाने से प्रकृति के संरक्षण और मानव कल्याण के बीच संबंध को लेकर चर्चा भी सामने आई है।

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