UNGA 2026: यूएई ने ईरान के तीन द्वीपों का मुद्दा उठाया, तनाव घटाने की अपील
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यूएई ने बातचीत और कूटनीति से विवाद सुलझाने की अपील की। UNGA में ईरान के नियंत्रण वाले ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों का मुद्दा भी उठा।
खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कूटनीति और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने कहा कि उनका देश तनाव कम करने, देशों के बीच संवाद बढ़ाने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है। उन्होंने बल प्रयोग, उसकी धमकी और दबाव बनाने की नीति का भी विरोध किया।
अल मरार ने क्षेत्रीय संकट के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा और व्यापार तथा ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री कानून और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक मार्गों की रक्षा की जानी चाहिए।
ईरान के नियंत्रण वाले तीन द्वीपों का मुद्दा उठाया
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान अल मरार ने ईरान के नियंत्रण वाले तीन द्वीपों—ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा—का मुद्दा भी उठाया। यूएई इन द्वीपों पर अपना दावा करता है और ईरान के नियंत्रण को स्वीकार नहीं करता।
अल मरार ने कहा कि यूएई लंबे समय से इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की मांग कर रहा है। उनके मुताबिक, इसका हल ईरान के साथ सीधे बातचीत के जरिए या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रास्ता अपनाकर निकाला जा सकता है।
ये द्वीप फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित हैं। ईरान ने 1971 में इन पर नियंत्रण स्थापित किया था। द्वीपों की स्थिति के कारण यह विवाद क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के लिहाज से भी अहम माना जाता है।
समुद्री रास्तों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर जोर
खाड़ी में संघर्ष के बीच यूएई ने जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। अल मरार ने कहा कि समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने की अपील की। यूएई ने कहा कि क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद वह विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।
वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में इजरायली कार्रवाइयों की निंदा
अपने संबोधन में अल मरार ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायल की कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। उन्होंने वेस्ट बैंक में इजरायली सैन्य गतिविधियों, बस्तियों के विस्तार और बसने वालों की हिंसा को रोकने की मांग की।
यूएई के मंत्री ने पूर्वी यरुशलम और धार्मिक स्थलों से जुड़े उल्लंघनों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने और फिलिस्तीनी मुद्दे के समाधान के लिए राजनीतिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
यूएई और इजरायल के बीच 2020 में अब्राहम समझौते के बाद राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। इसके बावजूद यूएई ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायल की नीतियों और कार्रवाइयों पर सार्वजनिक रूप से आलोचना की है।
नेतन्याहू की यूएई यात्रा भी चर्चा में
क्षेत्रीय तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को यूएई का दौरा किया और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, बातचीत में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, यूएई के संयुक्त राष्ट्र संबोधन में अल मरार ने कूटनीति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर विवादों के समाधान पर जोर दिया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है असर
खाड़ी क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े समुद्री मार्गों के कारण यहां बढ़ने वाला तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। यूएई ने इसी संदर्भ में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई।
यूएई का कहना है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिया गया उसका संदेश तनाव कम करने, संप्रभुता का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादों को सुलझाने पर केंद्रित रहा।
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