गगनयान मिशन में देरी पर बोले अंगद प्रताप, सफलता के लिए धैर्य जरूरी
गगनयान मिशन में देरी पर ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में धैर्य जरूरी है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्री तय कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण जारी रखे हुए हैं और मिशन को 2027 में प्रस्तावित किया गया है।
गगनयान मिशन के लिए चयनित अंतरिक्ष यात्री दल के सदस्य ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने मिशन में हो रही देरी को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की शुरुआत में समयसीमा में बदलाव होना असामान्य नहीं है। मिशन को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए जल्दबाजी के बजाय धैर्य के साथ तैयारी आगे बढ़ाना जरूरी है।
तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है प्रशिक्षण
बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 के दौरान पत्रकारों से बातचीत में अंगद प्रताप ने बताया कि गगनयान के लिए चयनित सभी अंतरिक्ष यात्री भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मुख्यालय की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण और तैयारियां कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शुरुआती मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों में कई तकनीकी और जमीनी तैयारियां एक साथ चलती हैं। इसलिए केवल उड़ान की तारीख तय करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मिशन की सुरक्षा और सफलता से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है।
‘गगनयान सिर्फ उड़ान भरने का मिशन नहीं’
प्रताप के मुताबिक गगनयान को केवल अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे जमीन पर बड़े पैमाने पर तकनीकी, प्रशिक्षण और संचालन संबंधी तैयारियां भी चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि मिशन में कुछ महीनों या एक-दो साल तक की देरी हो सकती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब मिशन लॉन्च हो तो वह सफल हो। शुरुआती चरण में किसी बड़ी विफलता से पूरे कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है।
अंतरिक्ष यात्री भी कार्यक्रम को तैयार करने में दे रहे योगदान
भारतीय वायुसेना के पूर्व लड़ाकू विमान पायलट रहे अंगद प्रताप ने बताया कि गगनयान के अंतरिक्ष यात्री केवल उड़ान के लिए प्रशिक्षण नहीं ले रहे हैं, बल्कि कार्यक्रम के विकास में भी अपनी विशेषज्ञता का योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह मानव-मशीन इंटरफेस के फ्रंट-एंड आर्किटेक्चर से जुड़ी डिजाइन प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। इस दौरान वह अपने विमानन और संचालन संबंधी अनुभव का इस्तेमाल करते हुए डिजाइनरों के साथ मिलकर सिस्टम की जरूरतों पर काम करते हैं।
2027 में प्रस्तावित है गगनयान का मानव मिशन
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को करीब तीन दिन के मिशन पर पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार गगनयान कार्यक्रम के तहत पहले मानव रहित मिशनों के जरिए विभिन्न प्रणालियों और तकनीकों का परीक्षण किया जा रहा है। मानव मिशन को 2027 में प्रस्तावित किया गया है।
गगनयान की सफलता भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और इससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए देश की क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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