India-China Relations 2026: जयशंकर बोले- सीमा की स्थिति तय करेगी रिश्तों की दिशा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन संबंध 2024 और 2025 की तुलना में बेहतर हुए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि रिश्तों का आगे सामान्यीकरण सीमा पर शांति और स्थिरता की स्थिति पर निर्भर करेगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-चीन संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सीमा पर तनाव के सबसे कठिन दौर के बाद अब बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने की दिशा और गति आगे भी सीमा पर शांति और स्थिरता की स्थिति से जुड़ी रहेगी।
जयशंकर के मुताबिक, 2025 की तुलना में 2026 में भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है और 2024 के मुकाबले भी स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने हालांकि इसे दोनों देशों के रिश्तों में किसी बड़े बुनियादी बदलाव का संकेत मानने से सावधानी बरतने की बात कही।
सीमा तनाव का संपर्कों पर पड़ा था असर
विदेश मंत्री ने कहा कि 2020 में सीमा पर घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। इसका असर केवल सीमा संबंधी मामलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी स्तर के संपर्क, अधिकारियों की आवाजाही, वीजा और सीधी उड़ानों जैसी व्यवस्थाओं पर भी पड़ा।
उन्होंने कहा कि व्यापारिक गतिविधियां जारी रहीं, लेकिन दोनों देशों के बीच कई अन्य संपर्क प्रभावित हुए। जैसे-जैसे सीमा पर तनाव कम हुआ, कुछ पुराने संपर्कों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
रिश्तों में सुधार को लेकर सतर्क रुख
जयशंकर ने कहा कि बंद पड़े संपर्कों का दोबारा शुरू होना सीमा पर परिस्थितियों में सुधार का स्वाभाविक परिणाम हो सकता है। इसे दोनों देशों के बीच सभी समस्याओं के समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने लंबे समय से भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना रहना किसी के हित में नहीं है। भारत का प्रयास ऐसा व्यावहारिक रास्ता तलाशना है, जो उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो।
सीमा को बताया सबसे अहम मुद्दा
जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों में सीमा को केंद्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि सीमा की स्थिति ही व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की दिशा को प्रभावित करती है। उनके अनुसार, सीमा पर तनाव बना रहने की स्थिति में रिश्तों को पूरी तरह सामान्य नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि सीमा पर हालात सामान्य होने के साथ व्यापार, यात्रा, अधिकारियों के संपर्क और दूसरे क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
दूसरे देशों के साथ संबंधों पर भी असर
विदेश मंत्री ने कहा कि चीन के साथ स्थिर संबंध भारत की व्यापक विदेश नीति के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इससे भारत को चीन के साथ अपने संबंधों के अलावा दुनिया के दूसरे प्रमुख देशों के साथ अपने रिश्तों को भी संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत एक साथ अमेरिका, यूरोप, जापान, रूस और अन्य साझेदारों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जयशंकर के मुताबिक, भारत किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करने के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर व्यावहारिक विकल्पों पर काम कर रहा है।
2020 के बाद रिश्तों में आया था तनाव
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 2020 के घटनाक्रम के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव आया था। गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद सीमा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा और इसका असर व्यापक भारत-चीन संबंधों पर भी पड़ा।
हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और उच्चस्तरीय संपर्क फिर बढ़े हैं। इसके बावजूद सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है। इसी वजह से भारत लगातार सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण शर्त बताता रहा है।
जयशंकर की टिप्पणी से स्पष्ट है कि भारत-चीन संबंधों में कुछ क्षेत्रों में सामान्यीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन व्यापक और स्थायी सामान्यीकरण के लिए सीमा पर स्थिरता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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