AI Manthan 2.0: हेल्थकेयर में AI से बीमारी की जल्द पहचान और बेहतर इलाज की उम्मीद, विशेषज्ञों ने बताए इस्तेमाल

लखनऊ में AI Manthan 2.0 के ‘AI for Healthcare’ सत्र में विशेषज्ञों ने मेडिकल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक इस्तेमाल पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बीमारी की शुरुआती पहचान, Digital Pathology और ओरल कैंसर स्क्रीनिंग में AI की भूमिका बताई।

Sep 14, 2026 - 15:16
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AI Manthan 2.0: हेल्थकेयर में AI से बीमारी की जल्द पहचान और बेहतर इलाज की उम्मीद, विशेषज्ञों ने बताए इस्तेमाल

लखनऊ: लखनऊ में आयोजित ‘AI Manthan 2.0’ के दूसरे दिन ‘AI for Healthcare’ सत्र में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा की। विशेषज्ञों के मुताबिक, AI की मदद से बीमारियों की शुरुआती और अधिक सटीक पहचान के साथ मेडिकल सेवाओं को तेज, प्रभावी और लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सकता है।

दो दिवसीय AI Manthan 2.0 का आयोजन राज्यपाल की अध्यक्षता में राज भवन और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की व्यावहारिक संभावनाओं और इससे जुड़े जोखिमों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

मेडिकल प्रैक्टिस में Generative AI का इस्तेमाल

Doctors AI Education and Research Foundation के डॉ. अमित कुमार डे ने ‘Generative AI for Clinical Practice’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने Predictive AI और Generative AI के बीच अंतर समझाते हुए मेडिकल क्षेत्र में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि Large Language Models (LLM) से मिलने वाले जवाबों को अंतिम या पूरी तरह सही जानकारी नहीं माना जाना चाहिए। मेडिकल क्षेत्र में AI का इस्तेमाल जानकारी को संक्षिप्त करने, उसे व्यवस्थित करने, फॉर्मेटिंग और ड्राफ्ट तैयार करने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI से प्राप्त मेडिकल तथ्यों, दवाओं की खुराक और अन्य महत्वपूर्ण डेटा को इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित करना जरूरी है।

Digital Pathology में बढ़ सकती है AI की भूमिका

Dr Lal PathLabs, New Delhi के Director of Renal Pathology and Electron Microscopy और Research and Development प्रमुख डॉ. आलोक शर्मा ने Digital Pathology, Haematology और Microbiology जैसे क्षेत्रों में AI की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि AI जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करने के साथ उसकी सटीकता बढ़ाने में मदद कर सकता है। उनके अनुसार, AI का उद्देश्य मौजूदा ऑटोमेशन सिस्टम को खत्म करना नहीं है, बल्कि उनकी क्षमता और कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है।

IIT Kanpur के विनायक पाठक ने भी AI की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डॉक्टरों की जगह लेने वाला विकल्प नहीं है। इसे डॉक्टरों के काम में सहायता देने वाले एक प्रभावी टूल के रूप में देखा जाना चाहिए।

ओरल कैंसर की पहचान में AI का इस्तेमाल

AIIMS New Delhi की प्रोफेसर दीपिका मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का उपयोग अब केवल रिसर्च और प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल वास्तविक क्लिनिकल सेवाओं में भी किया जा रहा है।

उन्होंने AI आधारित टूल्स और ‘Aarogya Sankalp’ मोबाइल एप्लिकेशन का उल्लेख किया, जिनका इस्तेमाल ओरल कैंसर की शुरुआती पहचान और रोकथाम के लिए किया जा रहा है।

प्रोफेसर दीपिका मिश्रा के अनुसार, छह राज्यों के नौ प्रमुख केंद्रों में किए गए अध्ययन के पहले चरण में 40,746 संदिग्ध मामलों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 9,643 मामलों को टेली-एक्सपर्ट्स ने संदिग्ध और 1,385 मामलों को हाई-रिस्क के रूप में चिन्हित किया।

48 गांवों में भी किया गया परीक्षण

उन्होंने बताया कि इस पहल का परीक्षण उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के 48 गांवों में भी किया गया है। इस तरह AI आधारित स्क्रीनिंग और डिजिटल हेल्थ टूल्स के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषज्ञों की पहुंच बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

AI Manthan 2.0 के इस सत्र में विशेषज्ञों की चर्चा से यह संकेत मिला कि आने वाले समय में AI स्वास्थ्य सेवाओं में बीमारी की शुरुआती पहचान, मेडिकल डेटा के विश्लेषण, पैथोलॉजी और क्लिनिकल कार्यों में महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इसके इस्तेमाल के साथ डेटा और मेडिकल जानकारी के सत्यापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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