ईरान की अमेरिका को नई चेतावनी, फारस की खाड़ी में Maritime Exclusion Zone बनाने का दावा

ईरान ने अमेरिका को नई चेतावनी देते हुए फारस की खाड़ी में Maritime Exclusion Zone बनाने का संकेत दिया है। इसी बीच Qassem Basir मिसाइल के इस्तेमाल और सऊदी अरब में हूती हमलों के दावों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।

Sep 08, 2026 - 11:14
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ईरान की अमेरिका को नई चेतावनी, फारस की खाड़ी में Maritime Exclusion Zone बनाने का दावा

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने मंगलवार को अमेरिका को आर्थिक युद्ध के खिलाफ कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी। ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने संकेत दिया कि अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में फारस की खाड़ी में समुद्री प्रतिबंधित क्षेत्र यानी Maritime Exclusion Zone बनाया जा सकता है।

ईरान की ओर से यह दावा भी किया गया है कि उसने अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ एक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। हालांकि, अमेरिकी सेना के अनुसार उसके युद्धपोत मिसाइल हमले से सुरक्षित रहे।

फारस की खाड़ी में प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने की चेतावनी

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि आने वाले दिनों में फारस की खाड़ी के कुछ हिस्सों में नया प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र घोषित किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, प्रस्तावित क्षेत्र उस इलाके से शुरू हो सकता है जहां से अमेरिका की ईरान नाकाबंदी शुरू होती है और यह खाड़ी के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है। ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया जा सकता है।

रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अमेरिका को ईरान की नई मिसाइल क्षमताओं को लेकर स्पष्ट संदेश मिल चुका है। उन्होंने आर्थिक दबाव के जवाब में समुद्री क्षेत्र को लेकर रणनीति बदलने की बात कही।

Qassem Basir मिसाइल को लेकर ईरान का दावा

ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में रेजाई के बयान को Qassem Basir बैलिस्टिक मिसाइल से जोड़ा गया है। दावा किया गया कि इस मिसाइल का इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ किया गया।

ईरान इस मिसाइल को अपनी उन्नत सैन्य तकनीक का हिस्सा बताता है। उसके अनुसार, मिसाइल में बेहतर दिशा-नियंत्रण और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचने की क्षमता विकसित की गई है।

हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसके युद्धपोत किसी मिसाइल हमले की चपेट में नहीं आए और उन्होंने खतरे से खुद को सुरक्षित रखा।

सऊदी अरब के कई शहरों में हूती हमले

इसी बीच क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान समर्थित हूती समूह की ओर से सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले किए जाने की खबर सामने आई है। यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के अनुसार, हमलों में 73 लोग घायल हुए।

घटना ने इस आशंका को और बढ़ा दिया है कि ईरान-अमेरिका टकराव का असर पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है। कूटनीतिक प्रयासों में ठोस प्रगति नहीं होने के कारण क्षेत्रीय संघर्ष के और व्यापक होने की चिंता बनी हुई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा दबाव

ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता अब भी उसके प्रमुख सैन्य विकल्पों में शामिल है। वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास दबाव बनाने की क्षमता रखता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और LNG व्यापार का आवागमन इसी जलमार्ग से होता था। ऐसे में यहां किसी भी तरह का गंभीर व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है।

ट्रंप का दावा- युद्ध जीतने के बाद घटेंगी तेल की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पेट्रोल की कीमत 3 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है और आगे चलकर 2 डॉलर से भी नीचे जा सकती है।

हालांकि, ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान के घोषित उद्देश्यों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना, उसके क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को सीमित करना और सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां तैयार करना जैसे लक्ष्य शामिल बताए गए हैं।

ईरानी नेतृत्व के बने रहने से तनाव बरकरार

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान का मौजूदा धार्मिक नेतृत्व अब भी सत्ता में बना हुआ है। तेहरान लगातार आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है और युद्ध के बाद अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ईरान अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। भविष्य में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के अधिकार को लेकर उसकी संभावित मांग क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद पैदा कर सकती है।

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